रामनगर की कोसी नदी में दुर्लभ पलास गल के दिखने से कॉर्बेट लैंडस्केप की जैव विविधता की मजबूती सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रवासी पक्षी का यहां दिखना इकोसिस्टम के स्वस्थ होने का सकारात्मक संकेत है।
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Image: Rare Pallas gull was spotted in Kosi River in Ramnagar
रामनगर: नैनीताल जिले के रामनगर स्थित कॉर्बेट लैंडस्केप से होकर बहने वाली कोसी नदी में दुर्लभ पलास गल (Pallass Gull) के दिखने से पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों में खुशी की लहर दौड़ गई है। आमतौर पर बड़े जलाशयों और खुले जलक्षेत्रों में पाए जाने वाले इस विशालकाय पक्षी का कोसी नदी में नजर आना क्षेत्र की जैव विविधता और स्वस्थ इकोसिस्टम का अहम संकेत माना जा रहा है।
Rare Pallas gull was spotted in Kosi River in Ramnagar
प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ सुमांता घोष ने इस अवलोकन की पुष्टि करते हुए बताया कि कोसी नदी में देखा गया पक्षी वास्तव में पलास गल है। उन्होंने बताया कि यह गल (Gull) प्रजाति का संभवतः सबसे बड़ा पक्षी माना जाता है। उनके अनुसार, यह प्रजाति शीतकाल के दौरान मंगोलिया और मध्य एशिया से प्रवास कर भारतीय उपमहाद्वीप में आती है और सर्दियों में उत्तर भारत के कुछ चुनिंदा जलक्षेत्रों में ही दिखाई देती है।
कोसी नदी में दिखना क्यों है खास
सुमांता घोष ने बताया कि पलास गल आमतौर पर उन क्षेत्रों में पाई जाती है, जहां पानी का स्तर अधिक हो और खुले जलक्षेत्र उपलब्ध हों। गंगा बैराज जैसे बड़े जलाशयों में इसकी उपस्थिति अपेक्षाकृत सामान्य मानी जाती है, जबकि कोसी नदी और कोसी बैराज में सामान्यतः जलस्तर कम रहता है। ऐसे में इस प्रजाति का यहां दिखना असामान्य और विशेष माना जा रहा है।
इकोसिस्टम की मजबूती का संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, कोसी नदी में पलास गल का दिखाई देना इस बात का प्रमाण है कि कॉर्बेट लैंडस्केप का इकोसिस्टम अभी भी प्रवासी और दुर्लभ पक्षियों के लिए अनुकूल बना हुआ है। यह अवलोकन यह भी दर्शाता है कि कोसी नदी और आसपास का क्षेत्र पक्षी संरक्षण के लिहाज से कितना महत्वपूर्ण है।
फ्रिक्वेंट विजिटर नहीं है पलास गल
सुमांता घोष ने स्पष्ट किया कि पलास गल को फ्रिक्वेंट विजिटर नहीं कहा जा सकता। यह पक्षी कॉर्बेट लैंडस्केप में आम तौर पर नहीं दिखता और इसकी मौजूदगी को काफी अनकॉमन माना जाता है। उन्होंने बताया कि कॉर्बेट क्षेत्र और आसपास की नदियां अपेक्षाकृत छोटी हैं, जबकि यह प्रजाति बड़े और खुले जलक्षेत्रों को अधिक पसंद करती है। इस मामले में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने कहा कि जैव विविधता और पक्षियों के लिए कोसी बैराज और यह पूरा क्षेत्र बेहद समृद्ध है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा इस क्षेत्र में वन्यजीव और पक्षी संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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पलास गल की खास पहचान
Image: Rare Pallas gull in Ramnagar
पलास गल एक बेहद आकर्षक समुद्री झीलों में पाया जाने वाला पक्षी है, जिसे ग्रेट ब्लैक-हेडेड गल भी कहा जाता है। आकार में यह सामान्य गल पक्षियों से काफी बड़ा होता है। प्रजनन काल में इसका सिर पूरी तरह काला हो जाता है। दूर से ही इसकी पहचान संभव होती है।
रामनगर की कोसी नदी में पलास गल का दिखना न केवल पक्षी प्रेमियों के लिए उत्साहजनक है, बल्कि यह प्रशासन और संरक्षण से जुड़े विभागों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत है कि कॉर्बेट लैंडस्केप और कोसी नदी का संरक्षण और सुदृढ़ किया जाना चाहिए। यह दुर्लभ अवलोकन उत्तराखंड की प्राकृतिक विरासत की समृद्धि को एक बार फिर रेखांकित करता है।