उत्तराखंड में कॉकरोच जनता पार्टी का ‘स्कूल ठीक करो अभियान’, सरकार से मांगी 826 स्कूलों की रिपोर्ट

उत्तराखंड में पांच साल में 826 सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद होने के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार से स्कूलवार रिपोर्ट और जवाब मांगा है। CJP ने 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए...
Advertisement No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..

Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.

Example Ads Media
Uttarakhand School News: CJP Seeks Answers on Closure of 826 Government Schools
Image: CJP Seeks Answers on Closure of 826 Government Schools

देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी प्राथमिक स्कूलों के बंद होने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने राज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान 826 सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद होने को लेकर सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। पार्टी ने इसके लिए सरकार को 10 दिन का समय दिया है और जवाब नहीं मिलने पर 2 अक्टूबर के बाद शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

CJP Seeks Answers on Closure of 826 Government Schools in Uttarakhand

826 स्कूलों के बंद होने का आंकड़ा राज्य सरकार की ओर से विधानसभा में दी गई जानकारी पर आधारित है। मार्च 2026 में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया था कि पिछले पांच वर्षों में 826 सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या पहाड़ी जिलों की है। इनमें टिहरी गढ़वाल में 262, पौड़ी गढ़वाल में 120, पिथौरागढ़ में 104 और अल्मोड़ा में 83 स्कूल शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार मुख्य कारण शून्य छात्र नामांकन बताया गया था।

CJP ने सरकार से मांगा स्कूलवार पूरा ब्योरा

CJP के नॉर्थ जोन कोऑर्डिनेटर श्रेष्ठ सिंह ने उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे हैं। उनका कहना है कि 826 बंद सरकारी स्कूलों की स्कूलवार रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। पार्टी ने प्रत्येक बंद स्कूल के संबंध में छात्र नामांकन, शिक्षकों की संख्या, उपलब्ध सुविधाएं, स्कूल बंद करने का कारण, आसपास की आबादी और निकटतम वैकल्पिक स्कूल की दूरी जैसी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। यह मांग CJP के 'School Thik Karo' अभियान के तहत उठाई गई है। अगस्त 2026 में पार्टी ने देशभर के राज्यों से सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं, शिक्षक रिक्तियों और सरकारी खर्च से जुड़ा पांच साल का डेटा भी मांगा था।

शिक्षक और बुनियादी सुविधाओं पर भी उठाए सवाल

CJP ने उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि राज्य के कई पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में माध्यमिक स्तर पर 4,745 लेक्चरर पद रिक्त थे। इनमें 808 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया चल रही थी, जबकि 3,937 पदों पर पदोन्नति से भर्ती की प्रक्रिया न्यायिक रोक के कारण प्रभावित थी।

270 स्कूलों में पेयजल को लेकर CJP का दावा

CJP ने अपने अभियान के दौरान उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में पेयजल सुविधा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि 270 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, यह आंकड़ा CJP के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। केंद्र सरकार के उपलब्ध 19 दिसंबर 2023 के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड के 19,123 स्कूलों में सभी में नल से जलापूर्ति दर्ज की गई थी। इसलिए 2026 में 270 स्कूलों की मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अलग से जरूरी होगी।

10 दिन में Education Road Map जारी करने की मांग

CJP ने सरकार से 10 दिनों के भीतर Uttarakhand Education Road Map जारी करने की मांग की है। पार्टी चाहती है कि इसमें शिक्षक, पेयजल, शौचालय, सुरक्षित स्कूल भवन, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर जिलावार लक्ष्य और समयसीमा तय की जाए। इसके साथ ही पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। इसमें स्कूल बस, मिनी बस या अन्य नियमित परिवहन व्यवस्था शामिल करने की मांग रखी गई है।

826 स्कूल बंद होने का सरकारी आंकड़ा क्या कहता है?

उत्तराखंड विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में 826 सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद हुए। सरकारी आंकड़ों में इन स्कूलों के बंद होने का प्रमुख कारण शून्य छात्र नामांकन बताया गया था। जिलावार आंकड़ों में टिहरी गढ़वाल सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 262 स्कूल बंद हुए। इसके बाद पौड़ी गढ़वाल में 120, पिथौरागढ़ में 104 और अल्मोड़ा में 83 प्राथमिक विद्यालय बंद किए गए। देहरादून में 38 और हरिद्वार में दो स्कूल बंद होने की जानकारी भी दी गई थी। इससे यह मुद्दा केवल स्कूल बंद होने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कम होते नामांकन, ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन और सरकारी स्कूलों की स्थिति जैसे व्यापक सवालों से भी जुड़ता है।

2 अक्टूबर के बाद आंदोलन की चेतावनी

CJP ने कहा है कि यदि 10 दिन के भीतर सरकार की ओर से बंद स्कूलों पर स्पष्ट जवाब और शिक्षा व्यवस्था को लेकर रोडमैप जारी नहीं किया गया, तो 2 अक्टूबर के बाद प्रदेशभर में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि सरकार को बंद हुए सभी 826 स्कूलों की स्थिति और उनके भविष्य को लेकर सार्वजनिक जानकारी देनी चाहिए।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी बात

CJP के नॉर्थ जोन कोऑर्डिनेटर श्रेष्ठ सिंह ने कहा कि यदि सरकार 10 दिन में 826 बंद स्कूलों पर रिपोर्ट जारी नहीं करती है तो पार्टी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग भी उठा सकती है। फिलहाल यह CJP की ओर से रखी गई राजनीतिक मांग है। सरकार की ओर से इस विशेष अल्टीमेटम और मांग पर प्रतिक्रिया आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

पहाड़ों में सरकारी स्कूलों का मुद्दा क्यों अहम?

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में सरकारी स्कूलों की स्थिति का मुद्दा छात्र संख्या, पलायन, शिक्षकों की उपलब्धता और स्कूल तक पहुंच जैसे कई पहलुओं से जुड़ा है। विधानसभा में उपलब्ध आंकड़ों में भी बंद हुए स्कूलों की बड़ी संख्या पहाड़ी जिलों में दर्ज हुई है। अब CJP के अल्टीमेटम के बाद सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की जा रही है कि बंद स्कूलों को लेकर आगे की नीति क्या होगी और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों के लिए शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल सरकार के जवाब और प्रस्तावित शिक्षा रोडमैप का इंतजार है।