देवभूमि में मां सरस्वती का घर, जहां आज भी मुख की आकृति बनाकर बहती है नदी

हम आपको उस स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां मां सरस्वती पहली बार प्रकट हुई थीं।
Advertisement Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand

Lesser-known treks offering breathtaking Himalayan views. A perfect blend of adventure, solitude, and spirituality.

Example Ads Media
Uttarakhand news: Devi saraswati temple of mana uttarakhand
Image: Devi saraswati temple of mana uttarakhand

: तू स्वर की देवी, संगीत तुझमें। हर शब्द तेरा, हर गीत तुझमें। ज्ञान, संगीत, कला, बुद्धिमता की देवी हैं मां सरस्वती। वेदों में, शास्त्रों में मां सरस्वती को एक अलग ही स्थान दिया गया है। लेकिन आज हम आपको उस स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां मां सरस्वती पहली बार प्रकट हुई थीं। वो स्थान भी कहीं और नहीं बल्कि देवभूमि उत्तराखंड में ही मौजूद है। अगर आपको वास्तव में खुद को प्रकृति और देवों के बीच महसूस करना है, तो देवभूमि उत्तराखंड चले आइए। चमोली में बद्रीनाथ मंदिर से तीन किलोमीटर आगे चले जाइए, वहां आपको सरस्वती नदी का उद्गम दिखेगा। कहा जाता है कि इसी जगह पर मां सरस्वती पहली बार प्रकट हुईं थीं। यहां सबसे हैरानी की बात ये है कि सरस्वती नदी की धारा भी यहां पर एक मुख की आकृति के रूप में बहती है।

यह भी पढें - Video: उत्तराखंड में हुआ था गणेश जी जन्म, यहां इस बात के कई सबूत हैं
जी हां आप गौर से देखेंगे तो यहां नदी की धारा एक शक्ल बनाती है। इसे मां सरस्वती का मुख भी कहा जाता है। ऐसा अद्भुत नज़ारा आपको सिर्फ उत्तराखंड के माणा गांव में 'भीम पुल' से ही दिखेगा। नदी की धारा पर जब सूर्य की रोशनी पड़ती है तो सामने इंद्र धनुष के सातों रंग नजर आते हैं।

#Fact मुख की तरह दिखने वाली यह आकृति प्रसिद्ध #सरस्वती नदी है, इसे सरस्वती का मुख भी कहा जाता है जो की सिर्फ उत्तराखंड...

Posted by eUttaranchal.com on Thursday, September 17, 2015

कहा जाता है कि ये सात सुर हैं जो देवी सरस्वती की वीणा के तारों में बसे हैं। भीमपुल से सरस्वती नदी धरातल के अंदर बहती हुई देखी जा सकती है। इसके बाद ये नदी लुप्त हो जाती है। महाभारत में भी सरस्वती नदी के अदृश्य होने का वर्णन है। आज भी हरियाणा और राजस्थान के कई स्थानो पर सरस्वती नदी के धरातल के भीतर बहने की बाते कहीं जाती हैं। राजस्थान में तो सरस्वती नदी को धरती पर लाने के लिए अरबों रुपये का प्रोजक्ट तैयार हो रहा है। लेकिन शायद ही कभी कोई इस नदी के असली रहस्य को जान और समझ पाए।

यह भी पढें - देवभूमि में जब भगवान नृसिंग की कलाई टूटेगी, तो अपना स्थान बदलेंगे बदरीनाथ !
उत्तराखंड के इस दिव्य स्थान से ही पांडवों ने स्वर्ग की यात्रा की थी। यही नहीं, महर्षि वेद व्यास जी ने इसी स्थान पर महाभारत की रचना की थी। इसी जगह पर मां सरस्वती का एक दिव्य मंदिर भी है। कहा जाता है कि गंगा, यमुना और सरस्वती के बीच में हुए विवाद की वजह से देवी सरस्वती को नदी के रूप में यहां प्रकट होना पड़ा था। श्रीमद्भगवद पुराण और विष्णु पुराण में भी इस कथा का ज़िक्र किया गया है। देवी सरस्वती का ये मंदिर दिखने में तो छोटा है लेकिन इसका महत्व बड़ा है। कहा जाता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से और देवी सरस्वती का मन से ध्यान करने पर जीवन में कुछ अच्छी घटनाएं होनी शुरू हो जाती हैं। यहीं पर यानी सरस्वती नदी के ठीक ऊपर एक बड़ी से शिला है जिसे भीम शिला भी कहा जाता है। अब जरा इस स्थान की विशेषता जानिए।