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: सवाल बहुत बड़ा है। हर मां बाप से जुड़ा सवाल है, हर उस अभिभावक से जुड़ा सवाल है, जो उत्तराखंड में अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं। कभी आपने गौर किया है कि आखिर फेयरवेल के लिए छात्रों से फीस क्यों वसूली जाती है ? खासतौर पर प्राइवेट स्कूल के छात्रों के अभिभावकों के लिए ये एक जरूरी खबर है। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर फेयरवेल पार्टी के लिए 11वीं के बच्चों को क्यों फीस देनी पड़ती है ? 2 से 3 हजार रुपये आखिर किस बात के ? क्या उत्तराखंड सरकार के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे को इस तरफ ध्यान नहीं गया ? शिक्षा मंत्री को ये ध्यान रखना चाहिए कि उन्होंने प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसने का अभियान शुरू किया था , एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू करवाई। पांडे जी को ये समझना चाहिए कि निजी स्कूल अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे।
दरअसल क्या है कि उत्तराखंड के प्राइवेट स्कूलों में 12 वीं में फेयरवेल के नाम पर जबरन वसूली की जा रही है। 12 वीं बोर्ड के बच्चों को फेयरवेल पार्टी दी जाती है और 11 वीं के बच्चों से पैसा वसूला जाता है। सिर्फ कोल्ड ड्रिंक और समोसे में 3 हजार रुपये चले गए क्या ? सवाल ये भी तो होना चाहिए कि अगर 300 बच्चों से 2-2 हजार रुपये वसूले गए हैं और सिर्फ पेस्ट्री और कोल्ड ड्रिंग में पार्टी निपटाई गई है, तो बाकी पैसे कहां गए ? एक वेबसाइट ने खबर छापी है कि देहरादून के वसंत विहार के सबसे प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में से एक कहे जाने वाले निजी स्कूल की जाँच कीजिए। इस स्कूल में 11 वीं के हर बच्चे से 2000 रूपये वसूले गए। स्कूल की 11 वीं कक्षा में 300 बच्चे पढ़ रहे हैं। तो ऐसे ही उत्तराखंड के अभिभावकों को लूटा जाएगा ? आप ही बताइए