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90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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: यूं तो भगवान शिव को कई नामों से पुकारा जाता है। लेकिन उनके 15 अवतारों में एक नाम भैरवगढ़ी का आता है। ये मंदिर देवभूमि उत्तराखंड में स्थित है। भैरवगढ़ी लैंसडाउन से लगभग 17 किमी की दूरी पर कीर्तिखाल की पहाड़ी पर मौजूद है। यहां कालनाथ भैरव की पूजा नियमित रूप से की जाती है। कीर्तिखाल पहाड़ी पर स्थित कालनाथ भैरव को सभी चीजें काली पंसद होती है और उन्हीं की पंसद पर कालनाथ भैरव के लिए मंडवे के आटे का प्रसाद बनाया जाता है। मंडवे के आटे से बने इस प्रसाद को रोट कहते हैं। भैरवगढ़ी को गढ़वाल मंडल का रक्षक माना जाता है। भैरव के साधक और पुजारी आज भी भैरवगढ़ी चोटी पर जाकर सिद्धि प्राप्त करते हैं। कहा जाता है कि यहां आकर हर किसी की मुराद पूरी होती है। अगर मुराद पूरी हो जाए, तो यहां श्रद्धालु चांदी का छत्र चढ़ाते हैं।