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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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: देवभूमि उत्तराखंड तपस्वियों की तपस्थली है। इस धरा के जादू से चमत्कृत होकर सदियों से महान तपस्वी इस जगह को अपनी साधना के लिए चुनते रहे हैं। साधकों का ऐसा ही एक मठ पिथौरागढ़ में स्थित है, जिसे श्रद्धालु हंसेश्वर मठ के नाम से जानते हैं। पिथौरागढ़ के इस मठ में पिछले ढाई सौ सालों से अखंड धूनी जल रही है, जिसकी भभूत लेने के लिए यहां श्रद्धालुओं की कतार लगी रहती है। इसके पीछे मान्यता है कि यहां की भभूत से कई बीमारियों का इलाज होता है। बाल रोग, त्वचा के रोग और मानसिक रोगों से पीड़ितों को ये भभूत दी जाती है। खास बात ये है कि मकर संक्रांति के मौके पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए आस-पास के गांवों के हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। हंसेश्वर मठ भारत-नेपाल सीमा पर महाकाली नदी के किनारे स्थित है।