ऐसे साधकों की साधना को नमन है। बदरीनाथ में -20 डिग्री तापमान में साधना कर रहे इन हठयोगियों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं।
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पंकज हटवाल
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ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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Image: Hathyogi in badrinath temple
: देवभूमि उत्तराखंड सदियों से साधकों की तपस्थली रही है। इस धरती की दैवीय आभा तपस्वियों को आत्मसाक्षात्कार कराती रही है। यहां के पहाड़ों में आज भी अद्भुत शक्तियों वाले योगियों को ध्यान लगाए देखा जा सकता है। ऐसा ही एक चमत्कार इन दिनों बदरीनाथ धाम में देखने को मिल रहा है। जहां तापमान माइनस 20 डिग्री पर पहुंचने के बावजूद 13 साधू योग-ध्यान में लीन हैं। चारों तरफ गिरी बर्फ और जमा देने वाली ठंड भी इनकी साधना के आगे बेअसर दिखती है। ये साधक नाममात्र के कपड़े पहनकर साधना करते हैं। वस्त्र के नाम पर शरीर पर केवल कंबल लिपटा होता है। कई साधक तो दिगंबर रूप में साधना कर रहे हैं। बदरीनाथ धाम करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। इन दिनों धाम के कपाट बंद हैं, लेकिन प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद 13 साधू अब भी धाम में रह रहे हैं।

कड़ाके की ठंड भी इन्हें साधना करने से रोक नहीं पाई। सर्दियों में जब बदरीनाथ धाम सहित ये पूरा उच्च हिमालयी क्षेत्र चार से छह फीट बर्फ से ढक जाता है तो पारा भी माइनस 20 डिग्री पर पहुंच ठिठुरने लगता है। ऐसे में ये साधक अपनी साधना की अलख जगाए रखते हैं। बाहर चाहे कितनी भी बर्फबारी हो रही हो इन साधुओं के स्नान और साधना पर इसका कोई असर नहीं होता, मानों मौसम ने इनके आत्मबल के आगे हार मान ली हो।

आपको बता दें कि बदरीनाथ धाम में कपाट बंद होने के बाद सन्नाटा छा जाता है। वहीं कुछ साधु तप के लिए प्रशासन की अनुमति लेकर बदरी नाथ में ही रहते हैं। कड़ाके की सर्दी और बर्फबारी के बीच साधु कुछ इस तरह तपस्या में लीन रहते हैं. जैसे भगवान साक्षात रूप में उनके साथ है। इन दिनों बदरीनाथ में 4 से 6 फीट बर्फ जमी है...लेकिन साधकों को ना तो बर्फबारी से फर्क पड़ रहा है, और ना ही बर्फीले पानी से...हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी ये साधक साधना में लीन हैं।