बदरीनाथ धाम में मौजूद है वो झील, जिसके पानी से आंखो के रोग दूर होते हैं

बदरीनाथ धाम में मौजूद शेषनेत्र झील और शेषनेत्र शिला के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा है...शेषनेत्र शिला से कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं।
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Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.

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उत्तराखंड: SHESHNETRA JHEEL IN BADRINATH DHAM
Image: SHESHNETRA JHEEL IN BADRINATH DHAM

: हिमालय की गोद में स्थित है देवभूमि का पावन बदरीनाथ धाम, जहां भगवान विष्णु ने नर और नारायण के रूप में तपस्या की... कहते हैं बदरीनाथ में एक दिन की तपस्या का फल एक हज़ार साल की तपस्या के समान माना जाता है, यही वजह है कि यहां पर पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। चारधाम यात्रा के शुरू होने के साथ ही बदरीनाथ धाम में श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचने लगे हैं। श्रद्धालु भगवान बदरी विशाल के साथ ही धाम में स्थित अन्य धार्मिक स्थलों के भी दर्शन कर रहे हैं। माणा रोड पर स्थित शेष नेत्र झील और शेष नेत्र शिला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। शेष नेत्र झील नारायण पर्वत की तलहटी में स्थित है। शेष नेत्र झील और शिला को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु भू बैकुंठ बदरीनाथ धाम में रहने आ रहे थे तो शेषनाग ने भी बदरीनाथ धाम में आने का आग्रह किया। तब भगवान विष्णु ने शेषनाग से कहा था कि आप नाग के रूप में भू बैकुंठ बदरीनाथ में रहेंगे तो मनुष्य आपके विशाल रूप को देखकर डरेंगे। ऐसे में आपके डर से लोग बदरीनाथ धाम नहीं पहुंचेंगे।

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कहते हैं कि भगवान विष्णु ने शेषनाग को शेष नेत्र शिला के रूप में यहां रहने की अनुमति दी थी, नारायण का आदेश मान कर शेषनाग ने शेषनेत्र झील के पास ही आंखनुमा शिला के रूप में अवतार लिया था। आज यहां पर श्रद्धालु घी से शेषनेत्र शिला का लेपन करते हैं, कहा जाता है कि लेपन किए गए घी को को नेत्र विकार से पीड़ित मनुष्य की आंखों पर लगाने से नेत्र संबंधित दु:ख दर्द दूर हो जाते हैं। इस बार धाम में हुई बर्फबारी से शेषनेत्र झील पानी से पूरी तरह भर गई है, धाम की यात्रा पर आए श्रद्धालु झील और शेषनेत्र शिला के दर्शन करने उमड़ रहे हैं। षटमासे पूज्यते देवः षटमासे मनवास्थिताः...बदरीनाथ धाम में पूजा के लिए यही चक्र निर्धारित है। छह महीने के लिए धाम की पूजा ‘नर हस्ते’ यानि मनुष्यों के हाथ आती है...जबकि शीतकाल के छह महीने देवतागण भगवान बदरीनाथ की पूजा करते हैं। इन दिनों बदरीनाथ धाम में दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी है, आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और इजाफा होगा।