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भीड़ से दूर, स्वर्ग के सबसे पास – केदार हिमालय के Hidden Treks
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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: देवभूमि के कण-कण में शिव बसते हैं, यही वो पावन भूमि है जिसे भगवान शिव ने अपना निवासस्थल बनाया, यहीं उन्होंने साधना की। इसी पावन धरा में कुमाऊं की गोद में बसा है प्राचीन जागेश्वर धाम जो कि केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मंदिरों की नगरी है। ये मंदिर सैकड़ों साल पहले बने थे। इस धाम के बारे में कहा जाता है कि यहां महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से जीवन तो सुधरता ही है, मृत्यु भी टल जाती है। जागेश्वर मंदिर समूह प्राचीनता के साथ ही अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। ये धाम 125 छोटे-बड़े मंदिरों का समूह है। कहा जाता है कि जागेश्वर मंदिर कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्राचीन मार्ग पर पड़ता है। ये शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रमुख ज्योर्तिलिंग है। इसे उत्तराखंड के पांचवे धाम के रूप में भी जाना जाता है। हर साल सावन महीने में यहां श्रावणी मेला लगता है जो कि 1 महीने तक चलता है। इसमें हिस्सा लेने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर साल यहां पहुंचते हैं।