केदारनाथ पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा...अंतरिक्ष ने सैटेलाइट इमेज से दिए बुरे संकेत

क्या केदारघाटी एक बार फिर तबाही के मुहाने पर खड़ी है। अंतरिक्ष से जो सेटेलाइट इमेज मिली हैं, उन्हें देख चिंता होना लाजिमी है...
Advertisement ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते

प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

Example Ads Media
उत्तराखंड: KEDARNATH SATALITE IMAGE APDA
Image: KEDARNATH SATALITE IMAGE APDA

: प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कभी भी इंसान के हक में नहीं रही। साल 2013 में केदारनाथ आपदा से पहले पहाड़ों को रौंदा जा रहा था, नदियों के रास्तों पर होटल-लॉज खुल गए थे, धंधेबाजों ने केदारघाटी का दोहन शुरू कर दिया था। फिर प्रकृति ने अपना इंसाफ किया और आपदा के बहाने नदियों-घाटियों में बनी अवैध बिल्डिंगें ध्वस्त कर दी। पर्यावरण के साथ हो रही छेड़छाड़ का ही नतीजा है कि हिमालय के ग्लेशियर पिघल रहे हैं, और केदारघाटी एक बार फिर तबाही के मुहाने पर खड़ी है। हमारा मकसद आपको डराना नहीं, बल्कि सतर्क करना है। हाल ही में केदारघाटी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों की कुछ सेटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें चोराबाड़ी झील के पास चार महत्वपूर्ण जल समूहों की पहचान हुई है। यानि चोराबाड़ी झील में एक बार फिर पानी इकट्ठा हो रहा है, यही नहीं पानी एकत्र होने वाली जगहें बढ़ रही है। आज तक की खबर के मुताबिक कुल मिलाकर केदारघाटी पर 2013 जैसा संकट आ सकता है। ये कोई छोटा मोटा खतरा नहीं बल्कि सैटेलाइट इमेज हैं।

यह भी पढें - जय केदारनाथ…दुनियाभर में सुपरहिट हुई ध्यान गुफा..बुकिंग फुल है..अब 3 और बनेंगी
चोराबाड़ी झील केदारनाथ धाम से 2 किलोमीटर ऊपर है। हाल ही में लैंडसैट 8 और सेंटीनेल-2B सेटेलाइट ने चोराबाड़ी और उसके आस-पास के इलाके की तस्वीरें ली थीं। ये तस्वीरें 26 जून को ली गईं, जिसमें साफ दिख रहा है कि पिछले 1 महीने में जल समूहों की संख्या 2 से 4 हो गई। विशेषज्ञों की मानें कि चोराबाड़ी जैसे इलाके में अगर पानी इकट्ठा हो रहा है तो शासन को इसे लेकर लापरवाह नहीं होना चाहिए। जेएनयू के प्रोफेसर और पर्यावरणविद एपी डिमरी करते हैं कि केदारघाटी में ऐसे जन समूहों का बनना चिंता की बात है। केदारनाथ घाटी भूकंप और पारिस्थितिकी की दृष्टि से बहुत संवेदनशील और कमजोर है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वैसे ये झीलें खतरनाक नहीं हैं, पर अगर मूसलाधार बारिश हुई तो परिणाम घातक हो सकते हैं। आपको बता दें कि साल 2013 में आई आपदा के वक्त भी ऐसे ही हालत बने थे। मूसलाधार बारिश और चोराबाड़ी झील के किनारे टूटने से केदारघाटी में तबाही मच गई थी। गौरीकुंड, सोनप्रयाग और फाटा में खूब तबाही हुई। 5 हजार से ज्यादा लोग मारे गए, हजारों लोग बेघर हो गए। करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा। सेटेलाइट तस्वीरों ने एक बार फिर शासन की बेचैनी बढ़ा दी है। प्रदेश सरकार इस मामले को लेकर सतर्क है, और एहतियात बरत रही है।