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भीड़ से दूर, स्वर्ग के सबसे पास – केदार हिमालय के Hidden Treks
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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: ये बात सच है कि देवभूमि दुनियाभर के लिए आस्था और विश्वास का संगम है। यहां कदम कदम पर मौजूद देवस्थानों की अद्भुत कहानियां आज भी दुनिया को हैरान करती हैं। आज हम एक ऐसे मंदिर के बारे में आपको बताने जा रहे हैं , जिसके बारे में कहा जाता है कि जम्मू के बाद मां वैष्णवी केवल यहां शक्तिपीठ के रूप में विराजमान हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं दूनागिरी मंदिर की…उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट बाजार से करीब 14 किमी दूर मंगलीखान बस स्टेशन से करीब 500 सीढ़ियां चढ़कर भक्त दूनागिरि माता के भव्य मंदिर में पहुंचते हैं। मान्यता है कि महाभारत काल में द्रोणाचार्य ने इसी पर्वत पर तपस्या की। ये भी कहा जाता है कि त्रेता युग में लंका युद्ध के दौरान जब लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे तो हनुमान संजीवनी बूटी के लिए द्रोणगिरि पर्वत को उठा लाए थे। इस पर्वत का एक टुकड़ा यहीं गिरा था, इसलिए इस स्थान को द्रोणागिरि पर्वत भी कहा जाता है। ये बात बद्रीदत्त पांडे द्वारा पुस्तक ‘कुमाऊं का इतिहास’ में भी दर्ज है। साढ़े सात हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद इस मंदिर में देश ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु मां पहुंचते हैं।