उत्तराखंड: रूड़की में किसानों का बवाल, बाइकों में लगा दी आग..प्रशासन में हड़कंप

एमवी एक्ट का विरोध कर रहे किसानों ने रुड़की मे दो बाइकों को आग के हवाले कर दिया, जमकर बवाल हुआ, पढ़ें पूरी खबर
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Farmers protest: Farmers protest in roorkee set fire on bike
Image: Farmers protest in roorkee set fire on bike

रुड़की: सोमवार को उत्तराखंड का रुड़की किसान आंदोलन की आग में सुलग उठा। गन्ना भुगतान की मांग कर रहे आंदोलनकारी किसानों ने रुड़की में ऐसा बवाल मचाया कि प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए। किसान अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर रुड़की में महापंचायत करने आए थे। इस दौरान नए मोटर अधिनियम के खिलाफ भी किसानों ने नाराजगी जताई। अपना विरोध दर्ज कराने के लिए किसानों ने रुड़की में जमकर बवाल किया। सड़क पर खड़ी दो बाइकों पर आग लगा दी। सोमवार को किसान अपनी मांगों को लेकर अधीक्षण अभियंता परिसर में धरना दे रहे थे। महापंचायत से पहले किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ बेलड़ी से लेकर रुड़की तक पैदल मार्च भी निकाला। बेलड़ी गांव में महापंचायत हुई। 70 ट्रैक्टरों पर सवार होकर सात सौ किसान बेलड़ी गांव पहुंचे थे। बाद में भाकियू के नेता पदम सिंह रोड के नेतृत्व में किसानों नें रुड़की का रुख किया। जैसे ही प्रशासन को सैकड़ों किसान प्रदर्शनकारियों के शहर में आने की सूचना मिली, अधिकारी घबरा गए।

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अधिकारियों ने किसान नेताओं से बातचीत की तमाम कोशिशें की, पर ना तो किसान माने और ना ही किसान नेता। मलकपुर, सोलानीपुल, रुड़की टॉकिज से होते हुए करीब 3 बजे किसान अधीक्षण अभियंता दफ्तर पहुंचे और धरना देने लगे। नारेबाजी कर रहे किसानों ने यहां दो बाइकों को आग के हवाले कर दिया। किसान किस बात पर बवाल काट रहे थे, ये भी बताते हैं। किसान कह रहे हैं कि उन्हें दो-दो साल से गन्ने का भुगतान नहीं हुआ है। बिल जमा ना होने पर ऊर्जा निगम किसानों के कनेक्शन काट रहा है। जब भुगतान ही नहीं होगा तो किसान बिल कैसे भरेंगे। नए मोटर अधिनियम को भी किसानों ने खूब कोसा। किसानों ने कहा कि अगर कोई बिना हेलमेट के खेत तक भी चला जाए तो उसका चालान काट दिया जाता है। जितनी कीमत वाहन की नहीं होती, उससे ज्यादा का जुर्माना ठोका जा रहा है। किसानों ने रुड़की-हरिद्वार रोड पर जाम भी लगाया। ट्रैफिक पुलिस को हाईवे पर फंसे वाहनों को गंगनहर के नए पुल की तरफ डायवर्ट करना पड़ा। किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होंगी, वो आंदोलन जारी रखेंगे।