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Secret Himalayan Treks Near Kedarnath You’ve Never Heard Of
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अल्मोड़ा: जीवन में कुछ अच्छा करने के लिए संसाधन नहीं इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। अल्मोड़ा के सरकारी स्कूल के एक टीचर ने इस बात को सच कर दिखाया है। अपनी पॉजिटिव सोच और मेहनत से अंग्रेजी के इस टीचर ने सरकारी स्कूल की तस्वीर ही बदल दी। ये शिक्षक हैं, भास्कर जोशी, जिन्हें हाल ही में एनसीईआरटी ने नवाचारी शिक्षकों की श्रेणी में अवॉर्ड देकर सम्मानित किया है। अल्मोड़ा से 60 किलोमीटर दूर एक गांव है बजेला, भास्कर इसी स्कूल में सहायक शिक्षक हैं। बजेला के सरकारी स्कूल तक पहुंचने के लिए 6 किलोमीटर पैदल पहाड़ी रास्ता तय करना पड़ता है। रास्ते में एक नदी भी पार करनी होती है। भास्कर यहां 6 साल पहले 2013 में नियुक्त हुए। ये उनके टीचिंग करियर की पहली नियुक्ति थी। भाष्कर बेहद उत्साहित थे, लेकिन जब उन्होंने स्कूल की हालत देखी, तो उनका दिल टूट गया। स्कूल में सिर्फ दस बच्चों का नामांकन था। वो भी स्कूल नहीं आते थे। भास्कर से पहले जो भी टीचर स्कूल में आए, वो पढ़ाने में कम और अपना ट्रांसफर दूसरी जगह कराने में ज्यादा बिजी रहे। बच्चों के माता-पिता भी उन्हें स्कूल भेजने की बजाय भेड़-बकरी चराने भेज देते थे, ताकि बच्चे घर के काम में हाथ बंटा सकें। भाष्कर को बुरा तो बहुत लगा, लेकिन उन्होंने परिस्थिति से भागने की बजाय इसे बदलने की ठानी। सबसे पहले बच्चों के माता-पिता को जागरूक किया। देर से ही सही बच्चों के अभिभावक उनकी बात समझ गए। आज इस प्राथमिक विद्यालय में 25 बच्चे पढ़ रहे हैं। रूपांतरण योजना की मदद से भास्कर ने स्कूल की सूरत बदल दी। आज स्कूल में बच्चों के लिए कंप्यूटर, स्मार्ट क्लासरूम है। बिजली-पानी की व्यवस्था है। बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए भास्कर ने इनोवेटिव तरीके अपनाए। बच्चों को खेल-खेल में पढ़ना सिखाया। उनके सरकारी स्कूल में बच्चों को पौष्टिक मिड डे मील मिलता है। स्कूल में किचन गार्डन भी है, जिसमें पैदा होने वाली सब्जियां मिड डे मील में इस्तेमाल होती हैं। बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ ही उनकी मातृभाषा और संस्कृति से जोड़ा जा रहा है। भास्कर जोशी कहते हैं कि शिक्षकों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते लोगों का सरकारी स्कूलों पर से भरोसा उठ गया है, ये सही नहीं है। मेरा प्रयास बच्चों को शिक्षा से जोड़ना है, सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए हर शिक्षक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, शिक्षा व्यवस्था में बदलाव तभी संभव है।