देवभूमि की माता अनुसूया 45 साल बाद देवरा यात्रा पर, आप भी कीजिए भगवती के दर्शन

मां अनुसूया 45 साल के लंबे अंतराल के बाद तीर्थों और प्रयागों के भ्रमण पर निकली हैं, देवरा यात्रा अगले 6 महीने तक जारी रहेगी...
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kedarnath temple: Maa anusuya doli yatra going kedarnath temple
Image: Maa anusuya doli yatra going kedarnath temple

देहरादून: गोपेश्वर के ग्रामीणों के लिए विजयदशमी का दिन बेहद खास रहा। विजयदशमी के दिन सती मां अनुसूया देवरा यात्रा पर निकलीं। अब मां अनुसूया अगले छह महीने तक देवरा यात्रा पर रहेंगी। यात्रा के दौरान वो अलग-अलग तीर्थों, धामों और प्रयागों का भ्रमण करेंगी। ध्याणियों को आशीर्वाद देंगी। वैसे तो उत्तराखंड में देव जात्राओं की परंपरा काफी पुरानी है, पर मां अनुसूया की देवरा यात्रा क्यों खास है ये भी बताते हैं। दरअसल ये मौका 45 साल बाद आया है, जबकि माता अनुसूया अपना मंदिर छोड़कर देवधामों की यात्रा पर निकली हैं। मां अनुसूया के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए भी ये दिन खास रहा। विजयदशमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना के बाद माता की डोली को यात्रा के लिए रवाना किया गया।

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मां सती अनुसूया को पुत्रदायिनी माना जाता है। उनकी अराधना से भक्तों का जीवन धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मां अनुसूया ने भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश की इच्छानुसार उन्हें बाल्यरूप में स्तनपान करा कर अपने सतीत्व की परीक्षा दी थी। 45 साल के लंबे अंतराल के बाद माता अनुसूया एक बार फिर भ्रमण पर निकली हैं। विजयदशमी को सती मां अनुसूया की देवरा यात्रा शुरू हुई। मंदिर से माता डोली में बैठकर यात्रा पर निकलीं। मां की डोली सबसे पहले केदारनाथ धाम पहुंचेगी। वहां माता भक्तों को आशीर्वाद देंगी। केदारनाथ धाम के बाद माता की डोली को बदरीनाथ धाम ले जाया जाएगा। बदरी-केदार यात्रा के बाद माता की डोली अलल-अलग तीर्थों, प्रयागों और धामों का भ्रमण करेगी। केदारनाथ यात्रा के दौरान मां अनुसूया की डोली सिरोली गांव में रात्रि विश्राम करेगी। जहां से चोपता होते हुए माता की डोली केदारनाथ धाम पहुंचेगी।