ट्रेन चलाएगी देवभूमि की बेटी छवि, भारतीय रेलवे में लोको पायलट पद के लिए हुआ चयन

छवि का चयन लोको पायलट पद के लिए हुआ है, अब वो ट्रेन चलाएंगी..ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाली वो अपने क्षेत्र की पहली बेटिया बनी हैं
Advertisement No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..

Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.

Example Ads Media
loco pilot Chavi: Chavi will run train after selected for loco pilot
Image: Chavi will run train after selected for loco pilot

रुड़की: रुड़की की बेटी छवि लोको पायलट बन ट्रेन चलाएंगी। छवि की उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि आज भी इस क्षेत्र को पुरुष वर्चस्व वाला क्षेत्र माना जाता है। बेहद कम लड़कियां हैं जो कि हवाई जहाज, कार, बाइक नहीं बल्कि ट्रेन चलाने का सपना देखती हैं। रुड़की की छवि कैंथ भी इनमें से एक है। छवि का चयन लोको पायलट के लिए हुआ है। अब वो ट्रेन चलाएंगी। छवि की इस उपलब्धि से छवि के माता-पिता ही नहीं बल्कि क्षेत्रवासी भी बेहद खुश हैं। छवि इस क्षेत्र की पहली ऐसी लड़की है जो कि लोको पायलट बन ट्रेन दौड़ाती दिखेगी। चलिए अब आपको छवि के बारे में कुछ और बातें बताते हैं। छवि के पिता अनिल कैंथ रुड़की के लॉर्ड कृष्णा पब्लिक स्कूल में सहायक अध्यापक हैं। उनकी दो बेटियां हैं। छवि कैंथ बड़ी बेटी है, वो हमेशा से कुछ अलग करना चाहती थी। छवि ने रुड़की के केएल पॉलिटेक्निक से इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा किया है। आगे पढ़िए

यह भी पढ़ें - उत्तराखंड में आवारा लड़के की बीच सड़क पर पिटाई, लड़की ने चप्पलों से पीटा..देखिए वीडियो
डिप्लोमा करने के बाद छवि सरकारी नौकरी की तलाश में थीं। इसी बीच उन्होंने लोको पायलट बनने के लिए आवेदन किया। इस पद के लिए कुल 70 लाख विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। जिनमें से सिर्फ 65 हजार अभ्यर्थी ही लोको पायलट पद के लिए चुने गए। रुड़की की छवि भी इनमें से एक है। छवि की इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों ने खुशी जताई। छवि कहती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि लोको पायलट पद के लिए उनका चयन हो जाएगा। इस पद के लिए लाखों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, पर सफलता सिर्फ 65 हजार अभ्यर्थियों को मिली। उन्होंने कहा कि लोको पायलट पद के लिए चुना जाना मेरे लिए गर्व की बात है। छवि ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता को दिया।