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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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टिहरी गढ़वाल: प्रदेश सरकार पशुपालन और कृषि को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं का फायदा प्रदेश के काश्तकारों को मिल रहा है। इसी कड़ी में उत्तराखंड ने ऑस्ट्रेलिया से 240 मेरिनों भेड़ का आयात किया है। जिसका उद्देश्य प्रदेश में भेड़ों की नस्ल का सुधार करना और ऊन का उत्पादन बढ़ाना है। आस्ट्रेलिया से आयात की गई भेड़ों को राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र कोपडधार में रखा जाएगा। जो कि टिहरी के घनसाली में है। प्रदेश को ये विदेशी भेड़ें राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के तहत मिली हैं। प्रदेश में भेड़ों के नस्ल सुधार कार्यक्रम से भेड़ पालकों को काफी फायदा होगा। पहाड़ों में रहने वाली बड़ी आबादी अब भी पशुपालन और खेती पर ही निर्भर है। भेड़ों के नस्ल सुधार कार्यक्रम से उन्हें उच्च गुणवत्ता की ऊन मिलेगी।