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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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देहरादून: उत्तराखंड में जब तक बवाल ना हो तब तक कोई काम नहीं होता। अब देहरादून रेलवे स्टेशन (dehradun railway station) का ही उदाहरण ले लें। जिसका नाम संस्कृत में लिखा जाना तय हुआ था। उत्तराखंड की दूसरी राजकीय भाषा संस्कृत है, इसीलिए प्रदेश के सभी रेलवे स्टेशनों के नाम संस्कृत में लिखे जाने हैं। देहरादून स्टेशन का नाम भी कुछ दिन पहले संस्कृत में लिखा गया था, लेकिन बाद में इसे बदलकर फिर से उर्दू में लिख दिया गया, जिस पर अब बवाल हो रहा है। अखिल भारतीय देवभूमि ब्राह्मण जन सेवा समिति और संस्कृत महाविद्यालय शिक्षक संघ समिति ने देहरादून स्टेशन का नाम संस्कृत की जगह दोबारा उर्दू में लिखने के विरोध किया। समिति के लोगों ने कहा कि ये संस्कृत भाषा का अपमान है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोगों ने स्टेशन निदेशक गणेश चंद ठाकुर का घेराव भी किया।