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भीड़ से दूर, स्वर्ग के सबसे पास – केदार हिमालय के Hidden Treks
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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चमोली: यह साल वाकई दुखों की गठरी लेकर आया है। एक तो कोरोना की टेंशन और ऊपर से कोरोना की वजह से सदियों से चल रही परम्पराओं में बदलाव होना। देवभूमि के देवस्थानों में हजारों सालों से चली आ रही परंपरा को कोरोना के कारण बदलना पड़ रहा है जो कि सबका मन दुखी कर रहा है। चार धामों में से एक बदरीनाथ के कपाट खुलने की तिथि में बदलाव किया गया है। हजारों सालों से बदरीनाथ के कपाट परम्परागत तरीके से खुलते थे और श्रद्धालु हर साल बेसब्री से बदरीनाथ की यात्रा का इंतजार करते थे। पूर्व में तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार बदरीनाथ के कपाट आज यानी कि 30 अप्रैल को खुलने थे मगर कोरोना संक्रमण को देखते हुए आज बदरीनाथ के कपाट नहीं खुले जिसके बाद वहां उपस्थित पुरोहितों ने भगवान से क्षमा मांगी। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि हर साल बसन्त पंचमी को टिहरी राज दरबार पंचांग गणना के आधार पर होती है।