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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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चमोली: शीतकाल के आगमन के साथ ही अब सभी धामों के कपाट बंद हो गए हैं। बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के बाद अब बदरीनाथ धाम के कपाट भी पूरे रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए हैं। धाम के कपाट बंद होने के समय तकरीबन 5 हजार श्रद्धालु वहां पर मौजूद रहे और उन्होंने बाबा बद्री विशाल के दर्शन किए। शीतकाल के लिए अब चारों धामों की यात्राओं का समापन भी हो गया है। गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद आज दोपहर में बदरीनाथ धाम के कपाट भी बंद हो गए हैं। कपाट बंद होने की प्रक्रिया कुल 2 घंटे चली। आज दोपहर 1:30 बजे से केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हुई और दोपहर 3:30 बजे तक मंदिर के कपाट पूरे विधि विधान के साथ बंद कर दिए गए। अब अगले 6 महीने तक भगवान बदरीनाथ की पूजा इंसान नहीं बल्कि देवता स्वयं करेंगे। जी हां, ऐसी मान्यता है कि भगवान बद्री विशाल की 6 महीने पूजा का अधिकार मनुष्य का होता है और 6 महीने पूजा का अधिकार देवताओं का होता है। पुराणों में भी इस बात का वर्णन है कि बदरीनाथ में शीतकाल में बाबा बद्री विशाल की देवताओं द्वारा पूजा की जाती है। मान्यता यह भी है कि शीतकाल में जब बदरीनाथ के कपाट बंद हो जाते हैं तब नारद मुनि धाम के मुख्य पुजारी बन जाते हैं और नारद मुनि भगवान ही प्रतिदिन मां लक्ष्मी और भगवान बदरीनाथ की पूजा एवं अर्चना करते हैं।