Advertisement
जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
Example Ads Media
चमोली: उत्तराखंड के पहाड़ों में मूलभूत सुविधा का होना भी एक सपने जैसा है जो कि अधिकांश पहाड़ों पर पूरा नहीं होता है। चाहे वह रोड की खराब हालत हो या फिर अस्पतालों की लापरवाही और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी होना हो, पहाड़ों पर जनजीवन इन सुविधाओं के ना मिलने से काफी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और सबसे दुख की बात यह है कि उनकी परेशानी को कोई भी जनप्रतिनिधि नेता या प्रशासन सुनने को तैयार नहीं है। हालत ऐसी है कि अगर किसी को गांव से अस्पताल जाना पड़ेगा तो पक्की सड़क ना होने के कारण और पालकी में बैठाकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। अस्पताल भी इतने किलोमीटर दूर है कि वहां जाते-जाते मरीज के साथ अनहोनी हो जाती है। ऐसा ही कुछ चमोली जिले में देखने को मिला जहां पर निजमूला घाटी में बीते रविवार को एक गर्भवती महिला ने सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे मूलभूत जरूरत की कमी की कीमत चुकाई और समय पर ना उपचार मिलने के कारण महिला को आसपास की स्थानीय महिलाओं द्वारा गदेरे में ही प्रसव करवाया गया। जी हां, इससे अधिक शर्मनाक और क्या होगा। एक ओर भारत विश्व गुरु बनने की राह पर है और दूसरी ओर उत्तराखंड में अब भी पालकी के जरिए गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए दूर के अस्पताल में ले जाया जा रहा है। बता दें कि चमोली जिले के भनाली गांव से पालकी के सहारे अस्पताल ले जा रही महिला जंगल के रास्ते में ही प्रसव पीड़ा हो गई जिसके बाद 2 किलोमीटर दूर के गांव से महिलाओं को मौके पर बुलाया गया और गदेरे में ही महिला का प्रसव करवाया गया। आगे पढ़िए