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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
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पिथौरागढ़: उत्तराखंड में आगामी 14 फरवरी को मतदान होना तय हुआ है। एक ओर जहां पूरे राज्य में चुनाव को लेकर गर्मजोशी का माहौल है तो वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड में शीतकाल भी चरम पर है। हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है। पिछले 1 हफ्ते से उत्तराखंड में बरसात और बर्फबारी का सिलसिला जारी है जिस वजह से कई पर्वतीय इलाकों में तापमान माइनस में जा चुका है। असहनीय ठंड के बीच में पिथौरागढ़ जिले के 36 बर्फीले मतदान केंद्रों तक पहुंचना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन सा साबित हो रहा है। अगर बारिश और हिमपात का क्रम यूं ही जारी रहा तो शायद पिथौरागढ़ के पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग वोट नहीं दे पाएंगे। दरअसल पिथौरागढ़ में बर्फबारी ने हाल बेहाल कर रखा है। यहां पर कई दिनों से लगातार बर्फबारी हो रही है जिस वजह से ठंड असहनीय साबित हो रही है। बूथ पर जिन कर्मियों की ड्यूटी लगाई होगी, उनको 2200 से 2400 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ से ढके बूथों पर अपनी ड्यूटी करनी होगी। कई इंच तक बर्फ जमा हो रखी है। घर से बाहर निकलना भी मुश्किल साबित हो रहा है। इस कदर बर्फ पड़ रही है कि बाहर आना-जाना भी बहुत मुश्किल से हो पा रहा है। ऐसे में प्रशासन के लिए मतदाताओं को बूथ तक लाना भी एक बड़ी चुनौती रहेगी। आगे पढ़िए
पिथौरागढ़ में नामिक मतदान केंद्र तक पहुंचना सबसे मुश्किल है। क्योंकि यह 2400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ऐसे में वोटरों को इस मतदान केंद्र में वोट देने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पिथौरागढ़ जिले से 25 किलोमीटर का बर्फ का पैदल रास्ता है। ऐसे में नामिक केंद्र के लिए 425 मतदाताओं को मतदान के लिए बागेश्वर से भेजना पड़ता है। बागेश्वर के गोगीना से 9 किलोमीटर पैदल चलकर यहां पहुंचा जा सकता है। पिथौरागढ़ में कुल 14 मतदान केंद्र ऐसे हैं जो 2200 से 2400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। 2007 में भी ऐसी ही परिस्थितियां उत्पन्न हुई थीं। उस समय के विधानसभा चुनाव में भी मौसम बेहद अनुकूल रहा था और तब 36 मतदान केंद्र पर युवा कर्मियों को तैनात किया गया था। 2007 में धारचूला विधानसभा के अंतर्गत आने वाले मतदान केंद्र सुमदुंग के पीठासीन अधिकारी शिक्षक राजेश मोहन उप्रेती ने अपनी चुनौतियों के बारे में बताते हुए कहा ' मतदान कर्मियों को बर्फ के बीच कई किमी पैदल चल कर पहुंचना पड़ा था। तब हमें मतदान से तीन दिन पूर्व रवाना होना पड़ा था। और मतदान के तीसरे दिन पार्टियां जिला मुख्यालय पहुंच सकी थीं। मार्ग की स्थिति भी खराब थी। वो तो गांव वालों का सहयोग रहा कि उन्होंने सेंकने के लिए लकड़ी, भोजन आदि की व्यवस्था में हमारी पूरी मदद की। '