उत्तराखंड: BJP में शामिल हुए कांग्रेस के महारथी किशोर, टिहरी से टिकट लगभग तय

कांग्रेस पार्टी ने अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Kishor Upadhyay को 6 साल के लिए पार्टी से किया निष्कासित, वे आज कर सकते हैं भाजपा जॉइन
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Kishor Upadhyay BJP: Kishor Upadhyay joins BJP
Image: Kishor Upadhyay joins BJP

टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल लाने में ना तो कांग्रेस पीछे है और ना ही भारतीय। भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में भाजपा ने सियासत गलियारों में हलचल तब मचा दी जब उन्होंने हरक सिंह रावत को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस बात को ज्यादा समय नहीं हुआ था कि कांग्रेस पार्टी ने भी सियासी गलियारों में एक बार फिर से हलचल पैदा कर दी है। कारण भी जान लीजिए भाजपा के बाद अब कांग्रेस ने अपने एक मुख्य सदस्य को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। कांग्रेस पार्टी ने उत्तराखंड के अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Kishor Upadhyay को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उनके खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप भी लगाए गए हैं। इस बीच किशोर के बीजेपी में जाने की खबर है और वो अब टिहरी से चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी की जिसमें उपाध्याय का नाम कहीं भी नहीं था। कांग्रेस पार्टी ने अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को 6 साल के लिए पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किया है। पार्टी के उत्तराखंड प्रभारी देवेंद्र यादव ने ट्वीट कर यह जानकारी दी। हाल ही में उपाध्याय को पार्टी के सभी पदों से हटा दिया गया था। उपाध्याय कुछ सप्ताह पहले तक उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए बनी कांग्रेस समन्वय समिति के प्रमुख की भूमिका निभा रहे थे और वह राज्य कांग्रेस कोर कमेटी तथा उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य थे। आगे पढ़िए

वहीं जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं कांग्रेस को उत्तराखंड में बगावत की चिंता जताई जा रही है। एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक प्रदेश में कांग्रेस में गुटबाजी बढ़ती जा रही है जो कि चुनाव के बीच अच्छा संकेत नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की टिकट को लेकर भी कई स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच में नाराजगी है तो वहीं कई दूसरी सीटों पर भी नेता और कार्यकर्ता टिकट ना मिलने के कारण नाराज चल रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस के नेता का कहना है कि पार्टी में नाराजगी को अगर खत्म नहीं किया गया तो लड़ाई और मुश्किल हो जाएगी। उनका कहना है कि 2012 में दोनों पार्टियों में लगभग बराबर के वोट थे। 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और भाजपा के बीच करीब 13 फीसदी वोटों का अंतर था। अगर इस बार कांग्रेस ने एकजुट होकर चुनाव नहीं लड़ा तो 13 फीसदी वोट के अंतर को पार कर जीत की दहलीज तक पहुंचना कांग्रेस के लिए मुश्किल हो जाएगा। बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए राज्य की सभी 70 सीटों पर 14 फरवरी को मतदान होगा। वहीं मतगणना 10 मार्च को होगी।