जय देवभूमि: अद्भुत, अद्वितीय है बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया..आप भी जानिए

वसंत पंचमी पर तय होगी बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि, जानिए कैसे संपन्न होती है पूरी प्रक्रिया
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badrinath dham: Know the process of opening the doors of Badrinath Dham
Image: Know the process of opening the doors of Badrinath Dham

चमोली: उत्तराखंड को यूं ही देवों की भूमि नहीं कहा जाता है। आस्था की असली झलक उत्तराखंड में ही देखने को मिलती है। पवित्र चार धाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यहीं पर स्थित हैं। हर साल चार धाम की यात्रा पर सैकड़ों श्रद्धालु उमड़ते हैँ और भगवान बदरी विशाल का आशीर्वाद लेने के साथ ही बाबा केदार, यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के दर्शन के लिए भी पहुंचते हैं। आज हम बात करेंगे बद्रीविशाल के धाम बदरीनाथ की।हिन्दुओं के चार धामों में से एक बदरीनाथ धाम भगवान विष्णु का निवास स्थल है। यह भारत के उत्तरांचल राज्य में अलकनंदा नदी के बाएं तट पर नर और नारायण नामक दो पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित है। गंगा नदी की मुख्य धारा के किनारे बसा यह तीर्थस्थल हिमालय में समुद्र तल से 3,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। बदरीनाथ को सृष्टि का आठवां वैकुंठ कहा गया है, जहां भगवान विष्णु 6 माह निद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं। यहां बदरीनाथ की मूर्ति शालिग्राम शिला से बनी हुई, चतुर्भुज ध्यानमुद्रा में है। यहां नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है और अखण्ड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

वसंत पंचमी में धाम खुलने की तिथि तय होती है। जी हां, डिमरी पुजारी गाडू घड़ा यात्रा में शामिल होने के लिए जोशीमठ के नृसिंह मंदिर से पांडुकेश्वर पहुंच गए हैं। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि वसंत पंचमी को राजदरबार नरेंद्रनगर में तय होती है। परंपरानुसार रविवार को डिमरी पुजारी गाड़ू घड़ा लेने के लिए जोशीमठ से पांडुकेश्वर योगध्यान मंदिर पहुंचे। बदरीनाथ डिमरी केंद्रीय पंचायत के कार्यवाहक अध्यक्ष विनोद डिमरी ने बताया कि सोमवार को गाडू घड़ा पांडुकेश्वर के योग ध्यान मंदिर में पूजा करने के बाद डिम्मर गांव के लक्ष्मीनारायण मंदिर में विराजमान होगा, जहां पूजा कर रात्रि विश्राम किया जाएगा। लक्ष्मी नारायण मंदिर में तीन दिनों तक ठहरने के बाद चार फरवरी को डिम्मर गांव से प्रस्थान किया जाएगा और ऋषिकेश होते हुए नरेंद्र नगर स्थित टिहरी नरेश के राज दरबार में पहुंचा जाएगा जहां वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने का दिन तय किया जाएगा।