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Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
Lesser-known treks offering breathtaking Himalayan views. A perfect blend of adventure, solitude, and spirituality.
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: चुनाव की रणभेरी बजते ही दिग्गज नेताओं ने ताल ठोककर कई सीटों पर मुकाबला दिलचस्प कर दिया है। प्रत्याशी रण में उतर चुके हैं। कई सीटों पर रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। अब देखने वाली बात ये होगी की जीत किसे मिलती है और किसे हार का मुंह देखना पड़ता है। राज्य समीक्षा की चुनावी यात्रा में इस बार हमारी टीम उत्तरकाशी के Purola assembly seat survey में पहुंची। हमने वहां के लोगों के दुख-सुख सुने, उनकी उम्मीदों और सपनों के बारे में जाना। सबसे बड़ी बात ये है कि अब पहाड़ का वोटर जागरूक हो गया है। वो अपने वोट की ताकत को पहचानता है। उसके लिए किसी प्रत्याशी का सिंबल मायने नहीं रखता, बल्कि उसकी शिक्षा और क्षेत्र के लिए उसका समर्पण मायने रखता है। बात करें प्रत्याशियों की तो पुरोला में बीजेपी और कांग्रेस में सीधी टक्कर है। बीजेपी ने दुर्गेश्वर लाल को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने मालचंद को प्रत्याशी बनाया है। बीजेपी प्रत्याशी दुर्गेश्वर पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं। वो तीसरे स्थान पर रहे थे, अब उनके सामने राजनैतिक भविष्य बचाने की चुनौती है। आगे देखिए वीडियो
इसी तरह राजनैतिक विरासत बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे मालचंद के पास दो बार जीत का अनुभव है। उनके काम को भी पुरोला के लोग खूब सराहते दिखते हैं। पुरोला के पूर्व विधायक राजकुमार कांग्रेस छोड़कर बीजेपी से जुड़ चुके हैं। इस बार भले ही वो पुरोला से मैदान में नहीं हैं, लेकिन युवा वर्ग शिक्षित राजकुमार से आज भी गहरा जुड़ाव महसूस करता है। चुनावी सर्वे के दौरान कई लोगों ने बीजेपी के प्रति नाराजगी जताई, हालांकि प्रधानमंत्री मोदी के काम से सब प्रभावित दिखे। ज्यादातर लोगों ने प्रधानमंत्री के नाम पर बीजेपी को वोट देने की बात कही। कुल मिलाकर पुरोला में इस बार राजनैतिक समीकरण बदले हुए हैं, ऐसे में बीजेपी के लिए जीत की राह आसान नहीं होगी। चलिए अब आपको Purola assembly seat survey पर तैयार स्पेशल वीडियो रिपोर्ट दिखाते हैं। रिपोर्ट देखें और अपने सुझाव हमारे साथ साझा करें। ताकि हम अपनी कोशिशों को और बेहतर बना सकें।