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पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पहाड़ों से भी अब दरिंदगी की खबरें सामने आ रही है। यहां पर भी तेजी से बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही हैं जो कि शर्मनाक है। हाल ही में शिवरात्रि बीती। शिवरात्रि के दिन ही पिथौरागढ़ के बस्ते क्षेत्र की 14 वर्षीय नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना होने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। बता दें कि 14 साल के मासूम नाबालिग के साथ चार दरिंदों ने बेरहमी से बलात्कार को अंजाम दिया। हादसे के बाद से स्थानीय लोग गुस्से में हैं। पिथौरागढ़ के बस्ते क्षेत्र में पीड़िता नाबालिग को न्याय दिलाने के लिए पिथौरागढ़ के लोग एक हो गए हैं और सीमांत जनपद के लोगों में जबरदस्त आक्रोश दिखाई दे रहा है। घटना के विरोध में विभिन्न संगठनों के लोगों ने एकजुट होकर धरना प्रदर्शन किया और पीड़िता को न्याय दिलाने एवं उसके परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की। लोगों का कहना है कि ब्लात्कार पीड़िता के गुनहगारों को फांसी मिलनी चाहिए।
चलिए आपको बताते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है। 1 मार्च को शिवरात्रि के दिन नगर के बस्ते से 14 वर्ष की बालिका गुमशुदा हो गई थी। जब बालिका मिली तो उसने अपने साथ 4 लोगों के द्वारा सामूहिक दुष्कर्म होने की बात बताई जिसके बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। आगे पढ़िए
सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आने के बाद पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया मगर पुलिस अब कोई भी सख्त एक्शन लेती हुए नजर नहीं आ रही है। जिसके बाद बीते बुधवार को गांधी चौक पर एकत्रित होकर लोगों ने हाथों पर तख्तियां लेकर दरिंदों को फांसी दो के नारे लगाकर धरना प्रदर्शन किया। लोगों ने पीड़िता और उसके परिजनों को सुरक्षा मुहैया करने की मांग भी उठाई है। इसी के साथ पीड़िता को सरकारी वकील उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। लोगों का कहना है कि अगर इन मांगों पर अमल नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करने पर बाधित होंगे। वहीं बलात्कार की घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार बेहद परेशान है और सहमा हुआ है। पीड़िता के परिजनों ने बताया कि परिवार पूरी घटना से बेहद आहत है और उनके परिवार को भी जान का खतरा है। उन्होंने बताया कि बीते मंगलवार की शाम को उनके घर के पास एक अनजान व्यक्ति आया और जोर-जोर से दरवाजे पर लात मार कर चला गया। फिलहाल पूरा परिवार मानसिक तनाव में है और और असुरक्षित महसूस कर रहा है। पीड़ित परिवार ने पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है। वहीं लोगों ने पीड़िता को जिला अस्पताल से प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करने की मांग की है और इसी के साथ में उसकी सुरक्षा के लिए वार्ड के बाहर तथा परिजनों की सुरक्षा के लिए घर के बाहर सुरक्षा कर्मी तैनात करने की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही उन्होंने पीड़िता को सरकारी वकील उपलब्ध कराने की मांग भी की है। इन मांगों पर अमल नहीं होने पर लोगों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।