उत्तराखंड में लोगों के दुश्मन बने सांप..बीते साल 21 मौत, 63 घायल और 10 लोग अपंग

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि Uttarakhand में गुलदार के बाद snake ही एक ऐसा जीव है, जो लोगों का सबसे बड़ा दुश्मन बनकर उभरा है।
Advertisement Secret Himalayan Treks Near Kedarnath You’ve Never Heard Of

Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.

Example Ads Media
uttarakhand snake bite: Many people died due to snake bite in Uttarakhand
Image: Many people died due to snake bite in Uttarakhand

उधमसिंह नगर: पहाड़ की जिंदगी में पग-पग पर खतरे हैं। एक तरफ गुलदार-बाघ लोगों की जान ले रहे हैं तो वहीं सांप के काटने से होने वाली मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है।

Many people died due to snake bite in Uttarakhand

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि उत्तराखंड में गुलदार के बाद सांप ही वो जीव है, जो लोगों का सबसे बड़ा दुश्मन बनकर उभरा है। बीते साल सांप के काटने से 21 लोगों ने जान गंवाई। सांप के काटने से 63 लोग घायल भी हुए, जिनमें 10 पूरी तरह अपंग तक हो गए। जबकि गुलदार के हमले में जान गंवाने वालों का आंकड़ा 22 रहा। इस तरह आप खुद समझ सकते हैं कि गुलदार के साथ-साथ सांपों से बचकर रहना भी कितना जरूरी है। राज्य में हर साल पांच से सात सौ सांप रेस्क्यू किए जाते हैं। ये लोगों के घरों में, खेतों, गाड़ियों या बिल्डिंगों में आते हैं, जिन्हें वन विभाग पकड़ कर दोबारा जंगलों में छोड़ देता है। उत्तराखंड में किंग कोबरा, कोबरा, रसेल वाइपर, ह्वाइट लिप्ड पिट वाइपर, ब्लैक बेलीड कोरल स्नेक सहित 40 से ज्यादा जहरीली प्रजातियों के सांप हैं। सांप के काटने से मरने वाले व्यक्ति के आश्रितों को वन विभाग पांच लाख का मुआवजा देता है। आगे पढ़िए

जबकि अपंग होने वाले को दो लाख तक का मुआवजा मिलता है। सांप के काटने से पशुओं की मौत पर भी 15 से 30 हजार तक मुआवजे का प्रावधान है। सांप के काटने के ज्यादातर मामले अप्रैल से सितंबर तक के हैं। पिछले मामलों से सबक से लेते हुए वन विभाग ने इस सीजन के लिए अलर्ट व एडवायजरी जारी की है। सांप के काटने से होने वाली मौतों को टालने के लिए दूसरे कई उपाय किए जा रहे हैं। जगह-जगह सांप पकड़ने के लिए टीमें भी तैनात की जा रही हैं, ताकि सांप के काटने से होने वाली मौतों को टाला जा सके। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन डॉ. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि हर साल सांप के काटने की कई घटनाएं सामने आती हैं। ऐसी घटनाओं में मुआवजे का भी प्रावधान है। उन्होंने लोगों से सांपों से बचकर रहने और उनके दिखने की सूचना वन विभाग को देने की अपील की। सांपों को पकड़ने के लिए वन विभाग की ओर से रेस्क्यू टीमें तैयार की जा रही हैं।