उत्तराखंड में वीरता पुरस्कार पाने वाले 1727 सैनिक एवं पूर्व सैनिक व 1130 वीर नारियां इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगी।
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कोमल नेगी
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Image: These people will travel free of cost in Uttarakhand roadways
देहरादून: देश को जांबाज सैन्य अफसर और जवान देने के मामले में उत्तराखंड का कोई मुकाबला नहीं।
These people will travel free of cost in Uttarakhand roadways
अब यहां के वीरता पुरस्कार प्राप्त भारतीय सैनिक और वीर नारियां (युद्ध विधवा) रोडवेज बसों में मुफ्त सफर कर सकेंगे। शासन की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। आदेश जारी होते ही परिवहन निगम की बसों में आज से मुफ्त सफर की शुरुआत भी हो गई है। उत्तराखंड में वीरता पुरस्कार पाने वाले 1727 सैनिक एवं पूर्व सैनिक व 1130 वीर नारियां इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। सचिव सैनिक कल्याण दीपेंद्र कुमार चौधरी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इस पर जो खर्च आएगा नियमानुसार उसका भुगतान एवं प्रतिपूर्ति सैनिक कल्याण विभाग की ओर से परिवहन निगम को किया जाएगा। निदेशक सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास विभाग को दिए आदेश में कहा गया है कि सैनिक कल्याण विभाग के आय-व्यय में नई मांग के माध्यम से बजट व्यवस्था कराने के लिए समय से प्रस्ताव तैयार कर इसे शासन को उपलब्ध कराया जाए।
बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले साल विजय दिवस के मौके पर वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और वीर नारियों को मुफ्त सफर की सौगात देने की घोषणा की थी। इसके बाद कैबिनेट ने मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप इस पर फैसला लिया था। बता दें कि राज्य में 1727 सैनिकों और पूर्व सैनिकों को महावीर चक्र, वीर चक्र, कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, सेना मेडल आदि विभिन्न वीरता पुरस्कार मिले हैं। वीर नारियों की बात करें तो प्रदेश में सबसे अधिक 203 वीर नारियां (युद्ध विधवा) पिथौरागढ़ जिले में हैं। इनमें 185 वीर नारियां देश के लिए शहीद हुए सैनिकों, 17 जेसीओ और एक शहीद सैन्य अधिकारी की पत्नी है। इसके अलावा अल्मोड़ा में 82, बागेश्वर में 97, चंपावत में 32, चमोली में 115, देहरादून में 143, हरिद्वार में 13, लैंसडाउन में 150, नैनीताल में 69, पौड़ी में 70, रुद्रप्रयाग में 43, टिहरी में 63, ऊधमसिंहनगर में 40 और उत्तरकाशी में 10 वीर नारियां हैं। अब ये सभी रोडवेज की बसों में मुफ्त सफर की सुविधा का लाभ उठा सकेंगी।