उत्तराखंड में 41 जिंदगियों को बचाने की जद्दोजहद जारी, 2 मिनट में पढ़िए पल पल की अपडेट

Silkyara Tunnel Collapse पीएमओ के उप सचिव मंगेश घिल्डियाल उत्तरकाशी पहुंचे, जहां उन्होंने टनल में फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए चल रहे ऑपरेशन का अपडेट लिया।
Advertisement Triyuginarayan - World’s Most Divine Wedding Destination

Couples are choosing the sacred land of Lord Shiva’s wedding to begin their own love stories.

Example Ads Media
Silkyara Tunnel Collapse: Uttarkashi Silkyara Tunnel Collapse Latest Update
Image: Uttarkashi Silkyara Tunnel Collapse Latest Update

उत्तरकाशी: उत्तरकाशी में सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बचाने की कोशिशें जारी हैं। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से लेकर बड़े अधिकारी अभियान पर नजर बनाए हुए हैं।

Silkyara Tunnel Collapse Latest Update

शनिवार को फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन रोका गया है। इस बीच शनिवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के उप सचिव मंगेश घिल्डियाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने सिलक्यारा में निर्माणाधीन टनल में फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए चल रहे ऑपरेशन का अपडेट लिया। अधिकारियों संग पहुंचे मंगेश घिल्डियाल ने चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से बात की और रेस्क्यू में आ रही अड़चनों के बारे में जाना। उधर, सिलक्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए चल रहे बचाव अभियान में लगातार समस्या आ रही है। आगे पढ़िए

शनिवार को सुरंग में ड्रिलिंग कार्य को रोक दिया गया। सुरंग बनाने वाली कंपनी एनएचआईडीसीएल के निदेशक अंशु मनीष खुल्को ने कहा कि फिलहाल सुरंग में ड्रिलिंग का काम रुका हुआ है। बता दें कि यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा से पोलगांव तक प्रस्तावित 4.5 किमी लंबी सुरंग में भूस्खलन होने से 41 मजदूर छह दिन से फंसे हुए हैं। यहां मजदूरों को बचाने की कोशिशें जारी हैं, हालांकि इसमें कई चुनौतियां हैं। शुक्रवार शाम एनएचआईडीसीएल ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि मशीन के बेयरिंग में खराबी आने के कारण काम रोक दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग आपदा (Silkyara Tunnel Collapse) से निपटने के लिए देश और दुनिया में चले पुराने सुरंग रेस्क्यू के अनुभवों के आधार पर कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए अधिकारी पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर समेत दुनिया के कई देशों में सुरंग निर्माण और आपदा के बाद हुए रेस्क्यू की तकनीक को अपना रहे हैं।