उत्तराखंड में एचआईवी संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले चार वर्षों में राज्य में कुल 4,556 एचआईवी संक्रमित मरीज पाए गए हैं। सबसे अधिक मामले देहरादून जिले में दर्ज किए गए हैं।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: HIV infection increasing in four districts of Uttarakhand
देहरादून: उत्तराखंड के चार बड़े जिलों में एचआईवी संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। उत्तराखंड में पिछले 4 सालों में साढ़े चार हजार से ज्यादा एचआईवी संक्रमण के मामले पाए गए हैं। पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले राजधानी देहरादून में दर्ज किए गए हैं। एचआईवी संक्रमण की बढ़ती हुई संख्या उत्तराखंड में स्वास्थ्य विभाग के माथे पर बल डाल रही है।
HIV infection increasing in four districts of Uttarakhand
उत्तराखंड के चार बड़े जिलों देहरादून हरिद्वार उधम सिंह नगर और नैनीताल में एचआईवी के सबसे ज्यादा मामले पाए गए हैं। पिछले 4 सालों में उत्तराखंड में कुल साढ़े चार हजार से ज्यादा एचआईवी संक्रमित मरीज मिले हैं जिनमें देहरादून में 1656 और नैनीताल में 998 एचआईवी संक्रमित मरीज दर्ज किए गए हैं। देहरादून में एचआईवी संक्रमण पूरे उत्तराखंड का 36% है। पिछले चार वर्षों में राज्य में कुल 4,556 एचआईवी संक्रमित मरीज पाए गए हैं। सबसे अधिक मामले देहरादून जिले में ही दर्ज किए गए हैं। प्रदेश के कुल एचआईवी संक्रमित मरीजों का 90% हिस्सा देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में है। वर्तमान में उत्तराखंड के HIV उपचार केंद्रों से 7,574 एचआईवी संक्रमित मरीजों को दवाएं दी जा रही हैं।
असुरक्षित यौन संबंध सबसे बड़ा कारण
रिपोर्ट्स के मुतबिक उत्तराखंड में एचआईवी संक्रमण के मुख्य कारणों में सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध बताया गया है। इसके अलावा इंजेक्शनों का गलत उपयोग दूसरा बड़ा कारण है। इसके अलावा एक बड़ा कारण उत्तराखंड में बाहर की जनसंख्या का प्रवासन भी शामिल है। खासकर, उत्तराखंड के मैदानी जिलों में बढ़ती हुई आबादी और बाहरी राज्यों से प्रवासियों का आना भी HIV संक्रमण दर बढ़ा है।
उत्तराखंड में जांच और उपचार
एचआईवी की पहचान और उपचार के लिए उत्तराखंड में 43 ICTC केंद्र और एक मोबाइल ICTC है। ये 43 स्टैंड अलोन जांच केंद्र एड्स संक्रमण से बचाव के लिए पूरी जानकारी देते हैं, इसके अलावा ये केंद्र जांच की सुविधा भी देते हैं। संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए उत्तराखंड में 12 एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी (ART) सेंटर संचालित हो रहे हैं, जहां से संक्रमित मरीजों को दवाएं भी दी जा रही हैं। हालांकि, यह दवाएं मरीज को पूरी तरह ठीक नहीं करतीं, लेकिन उनकी आयु को बढ़ाने में मददगार साबित होती हैं।