मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने खेत में उगाए धान से बने चावल पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को भेंट किए। यह भेंट राजनीति के बीच उत्तराखंड की कृषि परंपरा, किसानों के सम्मान और आत्मीयता का प्रतीक बनी।
-
राज्य समीक्षा डेस्क
-
Advertisement
Triyuginarayan - World’s Most Divine Wedding Destination
Couples are choosing the sacred land of Lord Shiva’s wedding to begin their own love stories.
Example Ads Media
Image: CM Dhami gifts Harish Rawat self-grown rice
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में शुक्रवार को एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जहां सियासत के बीच आत्मीयता और परंपरा की खुशबू घुलती नजर आई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से उनके देहरादून स्थित आवास पर मुलाकात कर अपने खेत में उपजाए गए धान से बने चावल भेंट किए।
CM Dhami presented rice to Harish Rawat
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुछ माह पूर्व अपने खेत में स्वयं हल चलाकर धान की रोपाई की थी। उस समय इस कदम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा हुई थी और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे लेकर तंज भी कसा था। अब उसी खेत में तैयार हुई धान की फसल से बने चावल सीएम धामी ने हरीश रावत को भेंट कर एक सधा हुआ राजनीतिक संदेश दिया।
डिफेंस कॉलोनी स्थित आवास पर हुई मुलाकात
शुक्रवार को मुख्यमंत्री धामी देहरादून की डिफेंस कॉलोनी स्थित पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के आवास पहुंचे। उन्होंने उनका हालचाल जाना और आत्मीय वातावरण में बातचीत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपने खेत में उत्पादित चावल उन्हें भेंट किए। जब मुख्यमंत्री ने खेत में हल चलाया था, तब हरीश रावत ने उस पर राजनीतिक टिप्पणी की थी। लेकिन अब मुख्यमंत्री खुद चावल लेकर उनके घर पहुंचे और यह दिखाया कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उत्तराखंड की परंपरा, किसानों का सम्मान और मानवीय रिश्ते सबसे ऊपर हैं।
किसानों और स्थानीय उत्पादों को सम्मान: सीएम धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह भेंट केवल चावल नहीं, बल्कि उत्तराखंड की कृषि परंपरा, किसानों की मेहनत और स्थानीय उत्पादों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पहचान खेती, किसान और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ी है और सरकार लगातार स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।
राजनीति में सौम्यता की मिसाल
इस मुलाकात को राजनीतिक गलियारों में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। जहां एक ओर सत्ता और विपक्ष के बीच वैचारिक मतभेद हैं, वहीं इस भेंट ने राजनीति में सौम्यता और शिष्टाचार की एक मिसाल पेश की है।