कैंची धाम मंदिर ट्रस्ट में बड़ी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर नैनीताल हाई कोर्ट ने सरकार और ट्रस्ट से कड़ा जवाब मांगा है। कोर्ट ने एक अधिवक्ता को इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त किया है..
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Questions Raised Over Kainchi Dham Trust Transparency
नैनीताल: कैंची धाम मंदिर में चढ़ावे और दान को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर नैनीताल हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और मंदिर के ट्रस्ट से स्पष्टीकरण मांगते हुए जवाब तीन हफ्तों के अंदर पेश करने को कहा है। कोर्ट ने अधिवक्ता धर्मेंद्र बर्थवाल को इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त किया है।
Questions Raised Over Kainchi Dham Trust Transparency
पिथौरागढ़ के रहने वाले ठाकुर सिंह डसीला के पत्र पर संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, बाबा नीम करौली द्वारा स्थापित इस धाम से संबंधित कई अहम जानकारियां न तो स्थानीय प्रशासन के रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दर्ज हैं और न ही रजिस्ट्रार कार्यालय में उपलब्ध हैं। ट्रस्ट का आधिकारिक नाम, कार्यालय का पता तथा ट्रस्टियों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी सार्वजनिक रूप से कहीं प्रदर्शित नहीं की गई है। याचिका में यह भी दलील दी गई है कि बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालुओं के आने और संभावित विदेशी चंदे को देखते हुए एफसीआरए (FCRA) के नियमों का सख्ती से पालन और वित्तीय लेन-देन में पूर्ण पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
HC ने लिया संज्ञान
कैंची धाम मंदिर में चढ़ावे के माध्यम से प्राप्त करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर नैनीताल उच्च न्यायालय (High Court) ने आज मामला खुद संज्ञान में लिया। चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं की जनहित याचिका (PIL) के रूप में मामला Nainital High Court में उठा। दावा किया गया है कि कैंची धाम मंदिर में प्राप्त चढ़ावे और दान के लेखांकन में गंभीर विसंगतियां और अनियमितताएं उजागर हुई, जिससे यह शक पैदा हुआ कि मंदिर के चढ़ावे का सही उपयोग नहीं हो रहा है।
सरकार और ट्रस्ट से जवाब तलब
अब मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने राज्य सरकार और मंदिर के ट्रस्ट से स्पष्ट जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि धार्मिक संस्थाओं के ऊपर जनता का विश्वास सर्वोपरि है और यदि किसी भी तरह की अनियमितता सामने आती है तो उसके लिए पारदर्शिता बेहद ज़रूरी है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को अंदरूनी लेखा–जोखा, खर्च विवरण और चढ़ावे की पावती से जुड़े दस्तावेज पेश करने के आदेश दिए हैं।
प्रशासन और ट्रस्ट की स्थिति
इस मामले में राज्य सरकार की धार्मिक मामलों की विभागीय टीम और मंदिर ट्रस्ट दोनों के लिए अब चुनौती यह है कि वे न्यायालय के समक्ष साफ-सुथरी रिपोर्ट पेश करें। यदि चढ़ावे के गलत इस्तेमाल का सबूत मिलता है, तो इसके गंभीर कानूनी परिणाम और ट्रस्ट की जवाबदेही तय किए जा सकते हैं।