केदारनाथ यात्रा मार्ग से जुड़े सोनप्रयाग क्षेत्र में एक 62 वर्षीय यात्री रात के अंधेरे में जंगल में भटक गया। एसडीआरएफ टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद करीब दो किलोमीटर अंदर से उसे सुरक्षित बाहर निकाला। प्रशासन ने डिजिटल मैप पर पूरी तरह निर्भर न रहने की अपील
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Hidden Gem Treks of Kedar Himalaya You Must Explore Once in Life
Peaceful and untouched trekking routes away from the crowds. Hidden trails where nature still remains raw and pure.
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Image: 62-Year-Old Pilgrim Lost in Forest Near Kedarnath Route
रुद्रप्रयाग: केदारनाथ यात्रा मार्ग से जुड़े सोनप्रयाग क्षेत्र में बीती देर रात एक यात्री के घने जंगल में भटक जाने से हड़कंप मच गया। मुनकटिया से लगभग 1.5 किलोमीटर आगे जंगल क्षेत्र में यह व्यक्ति रास्ता भटक गया और अंधेरे के कारण मुख्य मार्ग नहीं खोज पाया। सूचना मिलते ही State Disaster Response Force Uttarakhand (एसडीआरएफ) की पोस्ट सोनप्रयाग टीम तत्काल मौके के लिए रवाना हुई।
62-Year-Old Pilgrim Lost in Forest Near Kedarnath Route
प्राथमिक पूछताछ में सामने आया कि 62 वर्षीय यात्री गूगल मैप का सहारा लेकर आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान वे मुख्य मार्ग से हटकर जंगल की ओर निकल गए और दिशा भ्रमित हो गए। रेस्क्यू किए गए व्यक्ति की पहचान राजभवन कौल (62 वर्ष), निवासी बाटोली, गोपदबनास, सीधी (मध्य प्रदेश) के रूप में हुई।
सफल रहा सघन सर्च ऑपरेशन
एसडीआरएफ टीम ने उप निरीक्षक संतोष परिहार के नेतृत्व में आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ सघन सर्च अभियान चलाया। घना अंधेरा, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ता और ठंडा मौसम रेस्क्यू के लिए चुनौतीपूर्ण रहे। करीब दो किलोमीटर अंदर जंगल में सर्चिंग के बाद यात्री को सुरक्षित खोज लिया गया। टीम ने उन्हें प्राथमिक उपचार देने के बाद स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया। स्थानीय लोगों ने एसडीआरएफ की त्वरित कार्रवाई की सराहना की।
जब कपाट बंद हैं तो यात्री कैसे पहुंचा?
गौरतलब है कि Kedarnath Dham के कपाट फिलहाल बंद हैं और खुलने में अभी लगभग दो महीने का समय शेष है। ऐसे में यात्रा मार्ग पर किसी यात्री का जंगल क्षेत्र में भटकना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करता है। यह घटना प्रशासनिक सतर्कता और स्थानीय सूचना तंत्र पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
प्रशासन की यात्रियों से अपील
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि पर्वतीय और संवेदनशील क्षेत्रों में केवल डिजिटल मैप पर निर्भर न रहें। स्थानीय प्रशासन या पुलिस से जानकारी लेकर ही आगे बढ़ें। आपात स्थिति में तुरंत पुलिस या एसडीआरएफ से संपर्क करें। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में तकनीक के साथ-साथ स्थानीय मार्गदर्शन भी बेहद जरूरी है।