उत्तराखंड बोर्ड में सिक्योरिटी गार्ड के बेटे ने लहराया परचम, मैरिट लिस्ट में आया नाम

Uttarakhand Board Result: सिक्योरिटी गार्ड के बेटे शुभम अवस्थी ने 10वीं में 93.6% अंक हासिल कर प्रदेश में 16वां स्थान प्राप्त किया। पढ़ें प्रेरणादायक कहानी।
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UK Board topper 2026: Uttarakhand Board Topper 2026
Image: Uttarakhand Board Topper 2026

हरिद्वार: उत्तराखंड बोर्ड (UBSE) परीक्षा 2026 के परिणाम 25 अप्रैल 2026 को घोषित किए गए, जिसमें 10वीं का कुल पास प्रतिशत 92.10% और 12वीं का 85.11% रहा। उत्तराखंड बोर्ड के परिणामों में एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल छू लिया।

Uttarakhand Board Topper 2026

जानकारी के अनुसार हरिद्वार के एक साधारण परिवार से आने वाले शुभम अवस्थी ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 93.6% अंक हासिल कर प्रदेश में 16वां स्थान प्राप्त किया। उनकी इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों को नहीं रोक सकतीं।
शुभम मूल रूप से हरिद्वार जिले के Lakhimpur Kheri के रतसिया गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता संतोष कुमार अवस्थी एक सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। हर परिस्थिति में उन्होंने शुभम का हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। जब बेटे की इस बड़ी उपलब्धि की खबर मिली, तो पिता की आंखें खुशी से भर आईं। यह पल उनके संघर्ष और मेहनत का सबसे बड़ा इनाम था। शुभम ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी नियमित पढ़ाई और अनुशासन को दिया। वह रोजाना लगभग 6 घंटे पढ़ाई करते थे और हर विषय पर बराबर ध्यान देते थे। उनका मानना है कि निरंतर मेहनत और समय का सही उपयोग ही सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है। उन्होंने बिना किसी दबाव के अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा। आगे पढ़िए..

शुभम Saraswati Vidya Mandir Inter College BHEL के छात्र हैं। उनकी इस उपलब्धि से विद्यालय में खुशी की लहर है। शिक्षक और सहपाठी सभी उनकी मेहनत और लगन की सराहना कर रहे हैं। उनकी सफलता ने स्कूल का नाम भी रोशन किया है। शुभम का सपना है कि वह आगे चलकर एक सफल इंजीनियर बने। इसके लिए उन्होंने 11वीं में विज्ञान विषय चुनने का निर्णय लिया है। वह अपनी पढ़ाई को और बेहतर बनाकर अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ना चाहते हैं।
शुभम अवस्थी की सफलता उन सभी छात्रों के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखते हैं। उनकी कहानी सिखाती है कि अगर मेहनत, अनुशासन और परिवार का साथ हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।