मद्महेश्वर यात्रा मार्ग पर श्रद्धालु की मौत के बाद शव लाने को लेकर DDRF और वन विभाग के बीच समन्वय की कमी सामने आई है। वन विभाग ने आरोप लगाया कि DDRF टीम शव को बीच रास्ते में छोड़कर लौट गई। जानिए पूरा मामला।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Allegations of negligence in bringing the body from Madmaheshwar
रुद्रप्रयाग: Madmaheshwar Temple यात्रा मार्ग पर एक श्रद्धालु की मौत के बाद शव को नीचे लाने के मामले में District Disaster Response Force (डीडीआरएफ) और वन विभाग के बीच समन्वय की कमी खुलकर सामने आ गई है।
Allegations of negligence in bringing the body from Madmaheshwar
वन विभाग ने आरोप लगाया है कि डीडीआरएफ टीम शव को बीच रास्ते में छोड़कर वापस लौट गई, जिसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों और श्रमिकों ने शव को रांसी मोटर मार्ग तक पहुंचाया।
क्या है पूरा मामला?
वन क्षेत्राधिकारी Vimal Kumar Bhatt के अनुसार शनिवार को मद्महेश्वर में रविंद्र प्रभाकर (50) नामक श्रद्धालु की मौत हो गई थी। 24 मई की सुबह वह गौण्डार पहुंचे ताकि शव को मद्महेश्वर से मोटर मार्ग तक लाने की व्यवस्था की जा सके। इसी दौरान एक अन्य तीर्थयात्री संजय कुमार, निवासी लखनऊ, उत्तर प्रदेश की मृत्यु की सूचना भी मिली। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर चार श्रमिकों की व्यवस्था कर एक शव को मोटर मार्ग तक पहुंचाया गया।
वन विभाग का कहना है कि मद्महेश्वर में मौजूद दूसरे शव को नीचे लाने के लिए तीन श्रमिकों को डीडीआरएफ टीम के साथ भेजा गया था। आगे पढ़िए..
बताया गया कि टीम शव को करीब आठ किलोमीटर नीचे खडारा तक लेकर आई, लेकिन इसके बाद टीम वापस लौट गई। आरोप है कि शव को आगे लाने की जिम्मेदारी बाद में वन विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय श्रमिकों को संभालनी पड़ी। इस घटना के बाद दोनों विभागों के बीच समन्वय और राहत कार्यों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
Madmaheshwar Trek Route Raises Safety Concerns
Madmaheshwar Temple का ट्रेक मार्ग कठिन और ऊंचाई वाला माना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हाल के दिनों में यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य समस्याओं और कठिन मौसम के कारण कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में आपदा राहत एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता महसूस की जा रही है। मद्महेश्वर पंच केदारों में से एक प्रमुख धाम है और उत्तराखंड की धार्मिक यात्राओं में इसकी विशेष मान्यता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच अब यात्रा मार्गों पर मेडिकल सहायता, शव रेस्क्यू प्रबंधन और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत करने की मांग उठ रही है।