उत्तराखंड में सरकारी अधिकारियों को आवंटित कई वाहनों पर सफेद नंबर प्लेट लगाए जाने का मामला चर्चा में है। परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने जांच के निर्देश दिए हैं। जानिए मोटर व्हीकल एक्ट के नियम और जुर्माने की पूरी जानकारी।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Uttarakhand Government Vehicles Under Scanner for Number Plate Rule Violations
देहरादून: उत्तराखंड में जहां आम नागरिकों द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन करने पर पुलिस और परिवहन विभाग तुरंत कार्रवाई करते हैं, वहीं अब सरकारी अधिकारियों को आवंटित वाहनों पर नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। कई सरकारी वाहन निर्धारित पीली नंबर प्लेट के बजाय सफेद नंबर प्लेट लगाकर सड़कों पर दौड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे नियमों के समान अनुपालन पर सवाल उठने लगे हैं।
Uttarakhand Government Vehicles Under Scanner for Number Plate Rule Violations
राज्य में यदि कोई आम व्यक्ति गलत नंबर प्लेट या मोटर व्हीकल एक्ट के अन्य नियमों का उल्लंघन करता है तो उसका चालान काटा जाता है या वाहन सीज तक किया जाता है। लेकिन शासन और विभागीय अधिकारियों को आवंटित कई वाहन कथित रूप से वर्षों से गलत नंबर प्लेट के साथ चल रहे हैं और उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। प्रदेश की सड़कों और सचिवालय परिसर में ऐसे कई वाहन आसानी से देखे जा सकते हैं, जिन पर "उत्तराखंड सरकार" और संबंधित अधिकारी का पदनाम लिखा होता है, लेकिन उनकी नंबर प्लेट सफेद रंग की होती है।
कमर्शियल वाहन पर होनी चाहिए पीली नंबर प्लेट
मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार कमर्शियल वाहनों पर पीले रंग की नंबर प्लेट और उस पर काले रंग के अक्षर होना अनिवार्य है। वहीं निजी वाहनों के लिए सफेद नंबर प्लेट निर्धारित की गई है। आरोप है कि कई सरकारी कमर्शियल वाहनों की मूल पीली हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट हटाकर सफेद नंबर प्लेट लगा दी गई है, जिससे वे निजी वाहनों की तरह दिखाई देते हैं।
गलत नंबर प्लेट पर कितना है जुर्माना?
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 192 के तहत गलत नंबर प्लेट लगाने, रंग बदलने या निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जा सकती है। इस नियम के तहत दोषी पाए जाने पर पहली बार 5,000 रुपये तक जुर्माना और दोबारा उल्लंघन पर 10,000 रुपये तक जुर्माना लगता है। इसके अलावा गंभीर मामलों में अन्य कानूनी कार्रवाई भी संभव होती है। आगे पढ़िए..
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने दिए जांच के संकेत
उत्तराखंड के परिवहन मंत्री Pradeep Batra ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच की जा रही है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) अनिवार्य है, जिसमें सुरक्षा कोड और डिजिटल पहचान मौजूद रहती है। ऐसे में गलत नंबर प्लेट लगाने वालों की पहचान करना आसान होगा। उन्होंने आगे कहा कि अब डिजिटल व्यवस्था और क्यूआर कोड आधारित सिस्टम के चलते नियमों से बचना आसान नहीं रहेगा। जिन वाहनों में अनियमितता मिलेगी, उनका चालान किया जाएगा और आवश्यक सुधार भी कराए जाएंगे।
जानिए किस वाहन पर कौन-सी नंबर प्लेट होती है
निजी वाहनों के लिए:- सफेद नंबर प्लेट, काले अक्षरों के साथ
व्यावसायिक (कमर्शियल) वाहनों के लिए :- पीली नंबर प्लेट, काले अक्षरों के साथ
निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए :- हरी नंबर प्लेट, सफेद अक्षरों के साथ
कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए :- हरी नंबर प्लेट, पीले अक्षरों के साथ
किराये की लग्जरी टैक्सी और होटल वाहनों के लिए :- काली नंबर प्लेट, पीले अक्षरों के साथ
अस्थायी पंजीकरण वाले नए वाहनों के लिए :- लाल नंबर प्लेट, सफेद अक्षरों के साथ
विदेशी दूतावास और राजनयिक वाहनों के लिए :- नीली नंबर प्लेट, सफेद अक्षरों के साथ
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट हटाना भी नियमों का उल्लंघन
वाहन निर्माता या शोरूम से जो नंबर प्लेट लगाई जाती है, उसे हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) कहा जाता है। इसमें विशेष सुरक्षा फीचर और डिजिटल कोड मौजूद रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी वाहन से HSRP हटाकर दूसरी प्लेट लगाई जाती है तो यह भी नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है और इसके लिए जुर्माने का प्रावधान है।
उठ रहे हैं जवाबदेही के सवाल
सरकारी वाहनों में कथित रूप से गलत नंबर प्लेट लगाए जाने के मामलों ने प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम नागरिकों पर सख्त कार्रवाई और सरकारी वाहनों के प्रति नरम रवैये को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं। अब सभी की नजर परिवहन विभाग और शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है कि क्या नियमों का उल्लंघन करने वाले सरकारी वाहनों पर भी वही कार्रवाई होगी जो आम जनता पर की जाती है।