उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल से लापता हुई एमबीए छात्रा बबीता पांडे का 10 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है। ड्रोन, हेलीकॉप्टर और सर्च ऑपरेशन के बावजूद रहस्य बरकरार है।
Advertisement
जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
Example Ads Media
Image: MBA Student Mysteriously Missing During Dayara Bugyal Trek
उत्तरकाशी: Dayara Bugyal को देश-दुनिया के ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों के लिए सबसे खूबसूरत, सुरक्षित और शांत ट्रेकिंग स्थलों में गिना जाता है। लेकिन इसी रमणीय वादी के गोई पड़ाव से Babita Pandey के रहस्यमय ढंग से लापता होने की घटना ने पूरे उत्तराखंड को चिंता में डाल दिया है।
MBA Student Mysteriously Missing During Dayara Bugyal Trek
छात्रा के लापता होने के बाद पुलिस, एसडीआरएफ, एसओजी और वन विभाग की टीमें लगातार खोज अभियान चला रही हैं। ड्रोन कैमरों, हेलीकॉप्टरों और आधुनिक तकनीकों की मदद से व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन अब तक बबीता का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। अक्सर ट्रेकर्स की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला Raithal Village इन दिनों मायूसी और चिंता में डूबा हुआ है। बबीता की तलाश में कई दिनों तक क्षेत्र में डटे रहे उनके परिजन भी भारी मन से वापस Ramnagar लौट चुके हैं।
स्थानीय लोगों ने साझा किए चौंकाने वाले तथ्य
रैथल में वर्ष 2002 से होमस्टे चला रहे 70 वर्षीय बीर सिंह राणा ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में इस तरह का रहस्यमय मामला कभी नहीं देखा। उन्होंने दावा किया कि सर्च ऑपरेशन के दौरान घटनास्थल से लगभग 600 मीटर दूर भालुओं के आपसी संघर्ष के संकेत मिले थे।
भालुओं की गतिविधियों ने बढ़ाई चर्चा
स्थानीय लोगों के अनुसार यह समय भालुओं के प्रजनन का होता है, जिसके कारण मादा भालू अधिक आक्रामक हो सकती हैं। हालांकि खोज टीमों को घटनास्थल पर किसी मानव संघर्ष या बबीता से जुड़ा कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला है।
क्या रास्ता भटक गईं बबीता?
ग्रामीणों और स्थानीय जानकारों के बीच यह संभावना भी चर्चा में है कि बबीता ऊंचाई वाले इलाकों की ओर जाने के बजाय रास्ता भटककर निचले क्षेत्रों की तरफ निकल गई हों। कुछ बुजुर्गों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में कई बार व्यक्ति अनजाने में अपेक्षित मार्ग से दूर निकल जाता है, जिससे तलाश और मुश्किल हो जाती है।
पुराने अनुभवों से जोड़ी जा रही घटनाएं
ग्रामीणों ने चर्चा के दौरान एक पुराने मामले का भी जिक्र किया, जिसमें वर्षों पहले एक पालतू बैल इलाके से गायब हो गया था और उसका कभी कोई पता नहीं चल पाया। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं की तुलना सीधे इस मामले से नहीं की जा सकती। ड्रोन, हेलीकॉप्टर, खोजी दलों और सैकड़ों जवानों की लगातार मेहनत के बावजूद अभी तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है। इससे यह मामला और भी रहस्यमय बनता जा रहा है।
क्षेत्र में चिंता और इंतजार का माहौल
जैसे-जैसे समय बीत रहा है, लोगों के मन में सवाल और गहरे होते जा रहे हैं। क्या बबीता किसी दुर्घटना का शिकार हुईं? क्या वह रास्ता भटक गईं? या फिर इस घटना के पीछे कोई और वजह है? इन सभी सवालों का जवाब फिलहाल जांच और खोज अभियान के नतीजों पर निर्भर है।
क्षेत्र में चिंता और इंतजार का माहौल
स्थानीय ग्रामीण, प्रशासन और बबीता के परिजन अब भी किसी सकारात्मक खबर की उम्मीद लगाए बैठे हैं। दयारा बुग्याल की शांत वादियों में इन दिनों सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है—आखिर बबीता पांडे कहां हैं?