उत्तराखंड में रिंगाल रोजगार का अच्छा जरिया बन सकता है, जैंती गांव में महिलाएं रिंगाल से राखियां बना रही हैं...
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कोमल नेगी
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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
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Image: ringaal rakhi uttarakhand
पिथौरागढ़: उत्तराखंड में रक्षाबंधन इस बार अलग-अनोखे अंदाज में मनेगा। बहनें अपने भाई की कलाई पर रिंगाल की राखियां बांधेंगी। प्रदेश के सुदूर सीमांत अंचल में 25 महिलाएं रिंगाल से राखियां बना रही हैं। ये राखियां जल्द ही बाजार में बिक्री के लिए उतारी जाएंगी। रिंगाल से कंडियां और दूसरे सामान तो तैयार किए ही जा रहे हैं, अब इनसे राखी भी तैयार की जा रही हैं। पिथौरागढ़ में बन रही रिंगाल की राखियां हस्तशिल्प के क्षेत्र में एक अभिनव प्रयोग है। जिसका श्रेय जाता है उत्तरापथ संस्था को। जिसने क्षेत्र की महिलाओं को रोजगार का नया जरिया दिया है। संस्था महिलाओं से राखियां बनवा रही है। संस्था इन तैयार राखियों को जल्द ही बाजार में उतारेगी। जैंती गांव में इस वक्त 25 महिलाएं राखी बनाने के काम में जुटी हैं। केवल राखियां ही नहीं रिंगाल से दस से ज्यादा तरह के प्रोजक्ट भी तैयार हो रहे हैं। रिंगाल से बनी राखियां प्लास्टिक से बनी राखियों का अच्छा विकल्प हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार तो मिल ही रहा है, पर्यावरण के लिए खतरा बन चुके प्लास्टिक की खपत भी कम होगी।
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एक वक्त था जब पहाड़ में रिंगाल से टोकरी, डोके और चटाईयां समेत कई तरह की चीजें बनाई जाती थीं। गांव में इनका खूब इस्तेमाल होता था। पर जैसे-जैसे गांव खाली होते गए, ये हस्तशिल्प भी खोता चला गया। खेती-पशुपालन का काम भी सिमट गया है। जिन लोगों की कई पीढियों ने रिंगाल के हस्तशिल्प को सहेजा वो बेरोजगार हो गए। अब उत्तरापथ संस्था रिंगाल के साथ नए प्रयोग कर रही है। इसी कड़ी में मुनस्यारी की महिलाओं को रिंगाल से राखियां बनाने की ट्रेनिंग दी गई। अब महिलाओं ने इसमें महारत हासिल कर ली है। रिंगाल की एक राखी की कीमत 25 रुपये तय की गई है। शुरुआत में 2 हजार राखियां बाजार में बिक्री के लिए उतारी जाएंगी। ये पहला मौका है जब कि प्रदेश में रिंगाल से राखियां तैयार की जा रही हैं। 50 से ज्यादा लोग इस काम से जुड़े हुए हैं। रिंगाल से माला, लॉकेट और यहां तक की कॉफी डिप भी तैयार की गई है। अच्छी बात ये है कि रिंगाल से बने प्रोडक्ट्स लोगों को पसंद आ रहे हैं। संस्था की तरफ से अब तक 42 मेलों में रिंगाल से बने प्रोडक्ट प्रदर्शित किए जा चुके हैं, जिन्हें लोगों ने खूब पसंद किया।