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90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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: पितृपक्ष शुरू होने के साथ ही देवभूमि के ब्रह्मकपाल तीर्थ में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। श्रद्धालु अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान करने के लिए दूर-दूर से ब्रह्मकपाल तीर्थ पहुंच रहे हैं। देवभूमि के चमोली में स्थित ब्रह्मकपाल तीर्थ का महात्मय बिहार के गया तीर्थ के समान बताया गया है। कहते हैं कि अलकनंदा के किनारे बसे इस तीर्थ पर पितरों का पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में इस जगह का विशेष महत्व बताया गया है। उत्तराखंड का चमोली जिला बदरीनाथ धाम के साथ ही ब्रह्मकपाल तीर्थ के लिए भी मशहूर है। बदरीधाम के कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालु ब्रह्मकपाल में पिंडदान करने के लिए पहुंचने लगते हैं। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से लेकर अश्विन कृष्ण अमावस्या तक पितृपक्ष के दौरान यहां श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। इस धाम में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है।