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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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चमोली: बदरीनाथ के समीप ही यह स्थान लीलाढूंगी के नाम से जाना जाता है। एक तरफ नर पर्वत विराजमान है तो दूसरी तरफ नारायण, जिसमे स्वयं नारायण भगवान विराजमान हैं। इस स्थान पर अगर आप थोड़ी देर खड़े होकर चारों और निहारोगे तो प्रतीत होता है कि क्यों इसे बैकुंठ कहा गया है। ऊँचे हिमशिखर और उनमें से निकलते असंख्य झरने...यहाँ बथों (हवा) इतनी तेज है कि असंख्य झरने उस उंचाई से धरती पर गिरने से पहले ही उड़ जाते हैं। वह स्वर्ग जिसकी आपने परिकल्पना भी नही की होगी...अलकनन्दा नदी के तट पर बसे लीलाढूंगी का इतिहास बहुत पुराना है। एक समय की बात है जब शिव और पार्वती केदारखंड (गढ़वाल) में अलकनन्दा नदी के समीप विचरण कर रहे थे। उन्हें वहां एक बहुत छोटा बालक मिला...वो बालक बहुत खूबसूरत था। उन्होंने उसे एक छोटे से मंदिर में रख दिया और स्वयं अलकनंदा नदी के तट पर चले गए। आगे पढ़िए