राज्य समीक्षा जन्मदिन के अवसर पर आपको बिपिन रावत के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें बता रहा है, जिनके बारे में जानकर आप भी गर्व से भर उठेंगे।
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Komal Negi
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Image: Happy Birthday General Bipin Rawat
पौड़ी गढ़वाल: बिपिन रावत…देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस। पहाड़ के इस लाल का पूरा जीवन देश के लिए समर्पित रहा। उनके सेनाध्यक्ष पद पर रहने के दौरान ही ये तय हो गया था कि उन्हें इस पद के बाद कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी। वर्तमान में सीडीएस के तौर पर जिम्मेदारी निभाने वाले पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत का आज जन्मदिन है। राज्य समीक्षा जन्मदिन के अवसर पर आपको बिपिन रावत के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें बता रहा है, जिनके बारे में जानकर आप भी गर्व से भर उठेंगे। आपको पहाड़ की उस मिट्टी पर गर्व होगा, जिससे सीडीएस बिपिन रावत जैसे देशभक्त निकले हैं। सीडीएस बिपिन रावत ने अपने सैन्य काल में देश की रक्षा के लिए कई बड़े निर्णय लिए हैं। आज वो 63 साल के हो गए हैं। जनरल रावत का परिवार कई पीढ़ियों से भारतीय सेना में सेवाएं दे रहा है।
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सीडीएस बिपिन रावत मूलरूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले हैं। उनके पिता एलएस रावत भी सेना में बड़े अधिकारी थे। वे भारतीय सेना के डिप्टी चीफ के पद से रिटायर हुए थे। साल 1978 में बिपिन रावत आईएमए से पास आउट हुए। जिसके बाद उन्हें 11वीं गोरखा राइफल्स की 5वीं बटालियन में कमीशन मिला। बिपिन रावत भारतीय सैन्य एकेडमी के बेस्ट कैडेट थे। उन्हें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर भी मिला था। बिपिन रावत ने कई लेख लिखे हैं, जो दुनियाभर में मशहूर हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा पर लिखे उनके लेख दुनियाभर के कई जर्नल्स में प्रकाशित किए जा चुके हैं। वो दक्षिणी कमान के कमांडर और सहसेनाध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं। उरी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने तत्कालीन जनरल बिपिन रावत के नेतृत्व में 29 सितंबर 2016 को पाकिस्तान में स्थित आतंकी शिविरों को ध्वस्त करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की थी।
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साल 2015 में मणिपुर में आतंकी हमले में 18 सैनिकों की शहादत के बाद 21 पैरा के कमांडो ने सीमा पार जाकर म्यांमार में आतंकी संगठन एनएससीएन के कई आतंकियों को ढेर कर दिया था। तब 21 पैरा थर्ड कॉर्प्स के अधीन थी, जिसके कमांडर बिपिन रावत ही थे। उनके नेतृत्व में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन ऑल आउट चलाया गया। आर्टिकल 370 के बाद जम्मू कश्मीर के हालात को काबू करने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। बिपिन रावत पाकिस्तान को सख्त लहजे में जवाब देने में मुखर रहे। बिपिन रावत का पहाड़ों से गहरा नाता रहा है, शायद ये एक बड़ी वजह है कि उनके इरादे चट्टानों की तरह मजबूत हैं। सीडीएस बिपिन रावत को उनके पूरे करियर में अब तक अनेकों सम्मान से नवाजा जा चुका है। जिनमें अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल और सेना मेडल आदि जैसे कई सम्मान शामिल हैं।