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Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
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देहरादून: उत्तराखंड की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जो भी आता है ज्यादा समय नहीं टिक पाता। इतिहास गवाह है कि जो भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हुआ है उसको शासनकाल खत्म होने से पहले ही कुर्सी से हाथ धोना पड़ा। रावत जी के साथ भी यही हुआ। अपनी ढीली ढाली सरकार और कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह को अप्रैल में भाजपा हाईकमान ने मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था और उनकी जगह यह कमान पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के हाथों में सौंप दी थी। वे आज भी मुख्यमंत्री के पद से हटाए जाने के निर्णय से खुश नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि तब त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस निर्णय पर चुप्पी साध ली थी और खुशी-खुशी तीरथ सिंह रावत को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री बनने की शुभकामनाएं भी दी थीं। मगर अब वे अपनी ही पार्टी के खिलाफ बोलते नजर आ रहे हैं और इसी के साथ सियासी गलियारों में एक बार फिर से चर्चा का विषय बन चुके हैं। त्रिवेंद्र अपनी ही पार्टी के हाईकमान पर तमाम सवाल उठा रहे हैं और भाजपा हाईकमान से उन को पद से हटाने का कारण मांग रहे हैं। त्रिवेंद्र रावत का कहना है कि सीएम के पद से हटाने का कारण उनको अभी तक नहीं दिया गया है जो कि सरासर गलत है। त्रिवेंद्र का कहना है कि जब भी किसी को सीएम के पद से हटाया जाता है तो कारण बताया जाता है और तमाम सवाल खड़े होना भी लाजमी है। यह पार्टी की जिम्मेदारी है कि इन सवालों के जवाब दे। दरअसल 9 अप्रैल को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया था। यह फैसला भाजपा हाईकमान ने बेहद ही अचानक लिया और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह उनकी कुर्सी पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को सौंपी गई। हालांकि तीरथ सिंह रावत जी 3 महीने भी कुर्सी पर टिक नहीं पाए मगर त्रिवेंद्र सिंह रावत पद से हटाए जाने को लेकर भाजपा से नाराज चल रहे हैं और उन्होंने कहा है कि अगर किसी को सीएम पद से हटाया गया है तो यह पार्टी की ज़िम्मेदारी है कि उनको सवालों के जवाब दे।