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पौड़ी गढ़वाल: देश के पहले चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल बिपिन रावत की बीते बुधवार हादसे में हुई मृत्यु के बाद से पूरा हिंदुस्तान रो रहा है। हमारे देश का एक ऐसा महत्वपूर्ण अंश जो हमारे देश के लिए किसी रीढ़ की हड्डी से कम नहीं था वह अंश अब हमेशा-हमेशा के लिए खो गया है। जनरल बिपिन रावत की इस तरह से दुर्घटना में मृत्यु होने के बाद हर कोई शोक में है। बिपिन रावत तन और मन दोनों से एक सच्चे फौजी थे और उन्होंने यह बात अपने जीवन के हर कदम पर साबित की है। 1978 में सेना का हिस्सा बने जनरल रावत हमेशा कहते थे कि एक सैनिक होने के नाते उन्हें हर समय देश की सीमाओं पर होना चाहिए। वे कर्म से ही नहीं, मन से भी पूरी तरह फौजी थे। वे चाहते तो रिटायरमेंट के बाद अपने परिवार के साथ किसी बाहर देश में ऐशो आराम और सुकून की जिंदगी जीते। मगर देश प्रेम के चलते वे कभी निश्चिंत नहीं बैठे। उन्होंने न ही दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में पोस्टिंग लेकर आराम की जिंदगी जीनी चाही। सेवानिवृत्त होने के पश्चात भी देश के प्रति उनका प्रेम कम नहीं हुआ। हर समय उनकी इच्छा यही होती थी कि वे देश के सैनिकों के साथ, उनके बीच में रहें। आगे पढ़िए
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