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ऋषिकेश: ऋषिकेश...योग की अंतरराष्ट्रीय राजधानी। तीर्थनगरी ऋषिकेश पूरी दुनिया में योग नगरी के रूप में मशहूर है। ये जगह आदिकाल से ही ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही है।
योग साधकों की लंबी साधना के दम पर आज ये शहर योग नगरी के रूप में ख्याति पा रहा है। यहां ध्यान योग के प्रेणता महर्षि महेश योगी और डॉ. स्वामी राम जैसे साधकों ने लंबे वक्त तक साधना की और भारत के योग को विदेश तक पहुंचाया। महर्षि महेश योगी और उनकी 84 कुटिया में ब्रिटेन के रॉक बैंड बीटल्स की कई धुनें बनीं। कहा जाता है कि मशहूर बैंड बीटल्स के सदस्य योग-ध्यान से इतने प्रभावित हुए कि वह भारत भी आ गए। वर्ष 1968 में यहां पश्चिम के मशहूर बैंड बीटल्स के चार सदस्य जॉन लेनन, पॉल मकार्टनी रिंगो स्टारर व जॉर्ज हैरिसन योग साधना के लिए आए थे। बैंड के सदस्य करीब तीन महीने तक महर्षि महेश योगी की 84 कुटी में रुके थे।
इसी वजह से इस कुटी को 'बीटल्स आश्रम' के नाम से भी जाना जाता है। साल 1980 में ऋषिकेष में पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग सप्ताह की शुरुआत हुई। तब से यहां अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का सिलसिला लगातार चलता आ रहा है। परमार्थ निकेतन आश्रम की ओर से प्रतिवर्ष होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में अब विश्व के सौ से अधिक देशों के योग साधक जुटने लगे हैं। यहां पतंजलि इंटरनेशनल योग फाउंडेशन, आरोग्य योग स्कूल, ऋषिकेश योग पीठ, परमार्थ निकेतन, स्वामी दयानंद सरस्वती केंद्र जैसे योग संस्थानों में साधक योग की शिक्षा लेने पहुंचते हैं। इतना ही नहीं ऋषिकेश के योग शिक्षक वर्तमान में विश्व के कई देशों में योग का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। यह भारत और दुनिया भर के कुछ सबसे प्रतिष्ठित योग स्कूलों और आश्रमों का घर माना जाता है।