उत्तराखंड: डॉक्टर-मशीनें सब मौजूद, फिर भी ENT सर्जरी ठप.. 16 महीनों से नहीं हुआ एक भी ऑपरेशन

जब तक अस्पताल प्रशासन ईएनटी सर्जरी शुरू करने का ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक मरीजों को राहत नहीं मिलेगी। अस्पताल में संक्रमण रोकने के लिए जरूरी सेनेटाइजर मशीनें भी बंद पड़ी हैं।
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ENT surgery stopped: ENT surgery stopped even after having doctor and machine
Image: ENT surgery stopped even after having doctor and machine

अल्मोड़ा: उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय, अल्मोड़ा एक प्रमुख अस्पताल है, वहां भी हालात बदतर हैं। ईएनटी सर्जरी के लिए योग्य विशेषज्ञ और अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद पिछले 16 महीनों से एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ।

ENT surgery stopped even after having doctor and machine

इस लापरवाही का सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब मरीजों को उठाना पड़ रहा है, जिन्हें मजबूरी में हल्द्वानी, देहरादून या अन्य बड़े शहरों में महंगा इलाज करवाने जाना पड़ रहा है। वर्तमान में अस्पताल में दो ईएनटी विशेषज्ञ कार्यरत हैं डॉ. एचसी गड़कोटी और डॉ. सोनाली जोशी। डॉ. गड़कोटी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ ओपीडी संभाल रहे हैं। डॉ. सोनाली जोशी की नियुक्ति चार महीने पहले हुई थी और वह एंडोस्कोपिक (दूरबीन विधि) सर्जरी करने में दक्ष हैं। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन की निष्क्रियता और उदासीनता के कारण अभी तक एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ। अल्मोड़ा अस्पताल में आखिरी ईएनटी सर्जरी 31 अक्टूबर 2023 को हुई थी। उसके बाद से आज तक एक भी ऑपरेशन नहीं किया गया, जबकि अब सभी संसाधन उपलब्ध हैं। यहां डॉक्टर हैं, आधुनिक उपकरण हैं, जरूरी संसाधन हैं, फिर भी ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं।

ईएनटी सर्जरी शुरू करने का ठोस निर्णय

यहां मरीजों को ऑपरेशन की सुविधा की जानकारी नहीं दी जा रही है। ईएनटी वार्ड को ठीक से संचालित नहीं किया जा रहा है। क्या केवल इसलिए कि ताकि वे निजी अस्पतालों में जाकर महंगा इलाज करवाने को मजबूर हों? अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही से मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता संजय पांडे लगातार अल्मोड़ा जिला अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं में सुधार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके प्रयासों से अस्पताल में एमआरआई, सिटी स्कैन और ऑडियोमेट्री जैसी सुविधाएं फिर से चालू हुई हैं। अब वह लेप्रोस्कोपिक सर्जरी मशीन लाने के लिए प्रशासन पर लगातार दबाव बना रहे हैं, लेकिन जब तक अस्पताल प्रशासन ईएनटी सर्जरी शुरू करने का ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक मरीजों को राहत नहीं मिलेगी। अस्पताल में संक्रमण रोकने के लिए जरूरी सेनेटाइजर मशीनें बंद पड़ी हैं। हर दिन सैकड़ों मरीज अस्पताल आते हैं, लेकिन संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी उपाय नहीं किए जा रहे हैं।

जनता के स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता

संजय पांडे ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत कर जल्द कार्रवाई की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब अस्पताल में योग्य डॉक्टर, आधुनिक मशीनें और सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं, तो मरीजों को बाहर क्यों जाना पड़े? यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य के प्रति प्रशासन की गंभीर उदासीनता है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज होने और स्वास्थ्य महानिदेशक से वार्ता के बाद प्रशासन कितनी जल्दी कार्रवाई करता है, या फिर मरीजों को इसी तरह परेशान होना पड़ेगा।