उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने बिना पंजीकरण और डिग्री कर डाली नियुक्तियां, 45 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति पर सवाल, सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत हुआ बड़े भष्टाचार का खुलासा.. पढ़िए
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: 45 specialist doctors appointment without registration and degree
नैनीताल: उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर से सवालों के घेरे में है। राज्य सरकार द्वारा 45 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति पर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूर्व कृषि अधिकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर जोशी ने मुख्य सचिव, सचिव स्वास्थ्य एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को विस्तृत शिकायत पत्र भेजा है।
45 specialist doctors appointed without registration and degree
यह दावा किया गया है कि नियुक्त चिकित्सकों में से कई के पास न तो विश्वविद्यालय/एनबीई द्वारा जारी मान्य पीजी डिग्री है और न ही उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण। शिकायतकर्ता का आरोप है कि डीजी हेल्थ कार्यालय से आरटीआई के माध्यम से मांगी गई प्रमाणित डिग्रियों और पंजीकरण की जानकारी नहीं दी गई। इसकी बजाय ‘सूचना उपलब्ध नहीं है’ कहकर जवाब टाल दिया गया। इसके बाद भी जब उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल द्वारा भी यह स्पष्ट किया गया कि बिना पंजीकरण पीजी डिग्री को एड नहीं किया जा सकता, तब भी इन चिकित्सकों की नियुक्ति को रद नहीं किया गया।
यदि शिकायत सही है, तो ये चिकित्सा सेवा नियमों का उल्लंघन है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो उत्तराखंड की स्वास्थ्य प्रणाली में गहरे भ्रष्टाचार की परतें खुल सकती हैं..
डीजी हेल्थ कार्यालय पर लापरवाही का आरोप
शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि डीजी हेल्थ कार्यालय ने बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति या जांच के यह नियुक्तियां कीं। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेज़ों से यह स्पष्ट हुआ कि न तो रिव्यू ऑफिसर, सेक्शन ऑफिसर, डिप्टी सेक्रेटरी, सेक्शन ऑफिसर और न ही एडिशनल सेक्रेटरी की ओर से इन दस्तावेजों की पुष्टि की गई। बावजूद इसके सचिव स्तर से आगे यह नियुक्ति की गई।
गंभीर प्रशासनिक चूक
यह पत्र मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत, मुख्य न्यायाधीश उत्तराखंड उच्च न्यायालय, भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय, राज्यपाल उत्तराखंड, मुख्य सचिव एवं अध्यक्ष उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल को भी भेजा गया है।
निरस्त हो नियुक्ति: RTI एक्टिविस्ट चंद्रशेखर जोशी
सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर जोशी मांग की है कि इन 45 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की तत्काल निष्पक्ष जांच की जाए। जिन चिकित्सकों के पास मान्य पीजी डिग्री और यूएमसी पंजीकरण नहीं है, उनकी नियुक्ति निरस्त की जाए और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए विभागीय कार्यवाही की जाए।
क्या कहता है कानून?
उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल के नियमों के अनुसार, बिना वैध पंजीकरण कोई भी चिकित्सक राज्य में प्रैक्टिस नहीं कर सकता। यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो यह सीधे-सीधे चिकित्सा सेवा नियमों का उल्लंघन है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है। अब तक इस मामले पर सरकार या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि जांच होती है और आरोप सही साबित होते हैं तो यह उत्तराखंड की स्वास्थ्य प्रणाली में गहरे भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करेगा।