उत्तराखंड: मतदाता सूची में बाहरी लोगों के नाम शामिल, हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में प्रस्तुत की गई याचिका में बताया कि गांव की मतदान सूची में 82 बाहरी वोटरों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें से अधिकांश लोग उड़ीया और अन्य राज्यों के हैं।
Advertisement 90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स

प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

Example Ads Media
उत्तराखंड पंचायती चुनाव: Names of outsiders included in voter list
Image: Names of outsiders included in voter list

नैनीताल: उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कुछ दिन पहले ही प्रत्याशी और मतदाता के नाम डबल मतदान सूची में होने का मामला सामने आया था, और अब मतदाता सूची में बाहरी लोगों के नाम शामिल होने का मामला भी सामने आया है। इस मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर आज सुनवाई हुई।

Names of outsiders included in voter list

उत्तराखंड में वर्तमान में पंचायत चुनाव की तैयारियों का कार्य जोर-शोर से चल रहा है, इसी बीच राज्य की मतदाता सूची में बाहरी व्यक्तियों के नाम शामिल होने का मामला भी प्रकाश में आया है। जानकारी के अनुसार, नैनीताल जिले के बुधलाकोट के निवासी आकाश बोरा ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें उन्होंने कहा है कि उनके गांव की मतदान सूची में 82 बाहरी वोटरों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें से अधिकांश लोग उड़ीया और अन्य राज्यों के हैं।

वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया चिन्हित लोगों का नाम

उन्होंने इस मामले की शिकायत एसडीएम कैंची से की थी, जिसके बाद एसडीएम ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की थी। जांच समिति ने वोटर लिस्ट का अवलोकन करने पर 18 बाहरी लोग पाए गए. आकाश बोरा ने कहा है कि मतदाताओं की अंतिम लिस्ट जारी होने के बावजूद चिन्हित 18 लोगों का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया। जनहित याचिका दायर करने के बाद आकाश बोरा द्वारा 30 ऐसे अन्य लोगों की सूची भी अदालत में प्रस्तुत की गई। जिनके खिलाफ शिकायत के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

एडीएम और एसडीएम नहीं दे पाए संतुष्टिपूर्ण जवाब

आज, शुक्रवार 18 जुलाई को, हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित एडीएम विवेक राय और एसडीएम कैंची से कोर्ट ने पूछा कि किस आधार और दस्तावेज के अनुसार इनको वोटिंग का अधिकार दिया गया। लेकिन ये लोग कोर्ट को अपने उत्तरों से संतुष्ट नहीं कर पाए। वहीं खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयुक्त और मुख्य सचिव को आगामी 28 जुलाई को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब

निर्वाचन आयोग ने बताया कि कुछ व्यक्तियों की पहचान की गई है। वोटर लिस्ट तैयार करते समय बीएलओ ने घर-घर जाकर मतदाताओं की पहचान की, और इसी आधार पर वोटर लिस्ट बनाई गई। कोर्ट ने आयोग से पूछा कि जब वोटर लिस्ट बनाई गई, तो क्या उस समय वोटरों के आधार कार्ड, वोटर आईडी या राशन कार्ड या स्थायी निवास से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई थी। यदि हां, तो उसका रिकॉर्ड प्रस्तुत करें, या फिर मौखिक रूप से नाम बताए जाने के आधार पर उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है।