उत्तराखंड: मासूम को दी जानलेवा ओवरडोज, पैसे भी ऐंठे.. पुलिस ने नहीं सुनी तो कोर्ट ने कराया मुकदमा

एक चिकित्सिक ने मासूम को एनेस्थीसिया की ओवरडोज दे दी, बच्चे की जान पर बन आई। परिजनों ने शिकायत की पर पुलिस ने नहीं की कोई सुनवाई, अब कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया मुकदमा.. पढ़िए
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kvr hospital: Doctor gave fatal overdose of anesthesia to child
Image: Doctor gave fatal overdose of anesthesia to child

उधमसिंह नगर: मुरादाबाद रोड स्थित केवीआर हॉस्पिटल के एक चिकित्सक ने 6 साल के मासूम को एनेस्थीसिया की ओवरडोज डोज दे दी, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। हॉस्पिटल स्टाफ ने बच्चे के परिजनों से सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए तथा इलाज के नाम पर 60 हजार रुपए भी ले लिए। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर हॉस्पिटल प्रबंधक व चिकित्सक के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है।

Doctor gave fatal overdose of anesthesia to child

मोहल्ला नेतानगर, सुल्तानपुर पट्टी, तहसील बाजपुर निवासी साजिद हुसैन पुत्र हामिद हुसैन ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को दिए प्रार्थना पत्र में कहा कि बीती 28 फरवरी को उसके 6 वर्षीय पुत्र अजमीर शेख को घर के बाहर खेलते हुए निचले होठ पर हल्की सी चोट लग गई थी। इसे दिखाने के लिए वह मुरादाबाद रोड स्थित केवीआर हॉस्पिटल आए। इमरजेंसी में डॉ. नवरतन ने कहा कि बच्चे के होठ पर टांके लगाने पड़ेंगे, जिसके लिए बच्चे को एनेस्थीसिया के इंजेक्शन से बेहोश करना पड़ेगा। जब उसने एनेस्थीसिया के इंजेक्शन पर एतराज जताया गया तो डॉक्टर ने कहा कि एनेस्थीसिया के इंजेक्शन से बच्चे की जान को कोई खतरा नहीं होगा, हमारी गारंटी है।

परिजनों को भ्रमित करता रहा डॉक्टर

डॉ. नवरतन, जो कि बीएएमएस है, ने स्वयं ही बिना एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के उसके बच्चे को एनेस्थीसिया की ओवरडोज दे दी, जिससे बच्चे की हालत बिगड़ने लगी तो डॉक्टर नवरतन परिजनों को डराकर कहने लगा कि बच्चे की जान को खतरा है, इसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ेगा और बिना पढ़ाए उसके भाई से कुछ कागजों पर अंगूठे व हस्ताक्षर ले लिए। वेंटिलेटर पर रखने के बाद डॉक्टर उसे भ्रमित करते रहे। न ही बच्चे से मिलने दिया और न ही बच्चे को देखने दिया। बच्चे का कोई विशेषज्ञ डॉक्टर भी देखने नहीं आया। डॉक्टर नवरतन से पूछने पर उसने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कुशाल अग्रवाल बच्चे को सुबह ही देख पाएंगे। इसी बीच कोई सर्जन भी बेटे के होठ पर टांके लगाने नहीं आया। उसके बच्चे के टांके भी डॉक्टर नवरतन व निचले स्टाफ ने ही लगाये और बच्चा बिल्कुल बेहोशी की स्थिति में चला गया था।

60 हजार रूपये अवैध रूप से वसूले

यही नहीं, हॉस्पिटल स्टाफ द्वारा फर्जी एंट्री डिस्वार्ज स्लिप बनाकर उससे लगभग 60 हजार रूपये अवैध रूप से वसूले गए। इसकी शिकायत उसने कुंडा थाना पुलिस से तथा पत्र द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से की, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर केवीआर हॉस्पिटल के प्रबंधक व डॉ. नवरतन के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।