डॉक्टर सलोनी ने गर्भवती महिला के दर्द को नजरअंदाज करते हुए साफ़-साफ़ कहा कि “यहां डिलीवरी नहीं होगी और अभी बच्चा पैदा होने का समय भी नहीं है..
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Image: Pregnant woman gives birth to baby on floor in hospital
हरिद्वार: उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार के एक महिला अस्पताल से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और अस्पतालों में मरीजों के साथ होने वाले व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां आधी रात को महिला अस्पताल में आई एक प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती महिला को भर्ती करने से मना कर दिया गया। जिसके चलते महिला ने मजबूरन अस्पताल के फर्श पर ही बच्चे को जन्म दे दिया।
Pregnant woman gives birth to baby on floor in Haridwar Hospital
जानकारी के अनुसार, बीते सोमवार रात करीब 9:30 बजे हरिद्वार जिले के ब्रह्मपुरी क्षेत्र की एक आशा कार्यकर्ता एक मजदूर की गर्भवती पत्नी को महिला अस्पताल लेकर पहुंची। गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से गुजर रही थी। महिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर सलोनी ने महिला को भर्ती करने से साफ इनकार कर दिया। डॉक्टर सलोनी ने गर्भवती महिला के दर्द को नजरअंदाज करते हुए साफ़-साफ़ कहा कि “यहां डिलीवरी नहीं होगी और अभी बच्चा पैदा होने का समय भी नहीं है।” जबकि गर्भवती महिला दर्द से तड़प रही थी, लेकिन डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ ने कोई मदद नहीं की और उसे बेसहारा छोड़ दिया।
आशा वर्कर से फोन छीनने का प्रयास
प्रसव पीड़ा के कारण महिला की स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उसने रात करीब 1:30 बजे महिला अस्पताल के फर्श पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। इस दौरान अस्पताल के किसी भी डॉक्टर, नर्स या कंपाउंडर ने उसे हाथ तक नहीं लगाया। लेकिन जब आशा वर्कर ने इस घटना का वीडियो बनाने रिकॉर्ड करने लगी तो स्टाफ द्वारा उसका फोन छीनने की कोशिश की गई। अस्पताल के स्टाफ ने महिला के प्रसव के बाद आशा कार्यकर्ता से कहा कि “तेरा मरीज है, तू खुद ही सफाई भी कर।” बच्चे का जन्म होने के बाद जब मामला गंभीर होता दिखाई दिया तो डॉक्टर ने खुद को बचाने के लिए महिला को अस्पताल में भर्ती कर लिया। फिलहाल मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।हरिद्वार महिला अस्पताल में हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रसूता फर्श पर दर्द से तड़प रही है और अस्पताल स्टाफ तमासा देख रहा है। इस घटना ने उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसूता के परिजनों और आशा कार्यकर्ता ने महिला अस्पताल की डॉक्टर, नर्स और कंपाउंडर पर आरोप लगाए हैं, इनमें से किसी ने भी प्रसूता की मदद नहीं की।
हरिद्वार के मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) आर.के. सिंह ने इस मामले में उल्टा आशा वर्कर पर ही सवाल उठाए और इसे “साजिश” करार दिया। उनका कहना है कि प्रसूता महिला को रात में ही अस्पताल में एडमिट किया गया था और वहीं उसकी डिलीवरी भी हुई। हालांकि इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। CMO ने जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक से रिपोर्ट तलब की है और कहा है कि जांच के बाद जो भी इस मामले में दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।