उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में कथित चिकित्सीय लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। पेड़ से गिरकर घायल हुई 34 वर्षीय महिला को समय पर सही इलाज नहीं मिलने के कारण संक्रमण बढ़ गया और डॉक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए पैर काटना पड़ा। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Woman loses leg due to negligence of doctors
पिथौरागढ़: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर समय-समय पर गंभीर आरोप लगते रहे हैं। लापरवाही और संसाधनों की कमी के कारण कई मरीजों को जान तक गंवानी पड़ी है। इसी बीच पिथौरागढ़ जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां कथित चिकित्सीय लापरवाही के चलते एक 34 वर्षीय महिला को अपना पैर गंवाना पड़ा।
Woman loses leg due to negligence of doctors
जानकारी के अनुसार पिथौरागढ़ जिले के झूलाघाट क्षेत्र के बिसखोली गांव की निवासी निर्मला देवी 25 जनवरी को पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। परिजन उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। निर्मला के पति नरेंद्र सिंह बोरा के अनुसार, अस्पताल में केवल उनके पैर पर बने घाव में टांके लगाए गए और उन्हें भर्ती कर दिया गया। आरोप है कि अंदरूनी चोटों या हड्डी की स्थिति की गहन जांच नहीं की गई।
पांच दिन बाद किया हायर सेंटर रेफर
परिजनों का कहना है कि निर्मला को पांच दिन तक जिला अस्पताल में रखा गया, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। 29 जनवरी को अचानक उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिजन उन्हें इलाज के लिए बरेली के एक अस्पताल ले गए, जहां जांच के बाद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।
समय पर इलाज न मिलने से फैला संक्रमण
बरेली के चिकित्सकों ने बताया कि समय पर सही इलाज न होने के कारण टूटी हड्डी में गंभीर संक्रमण हो गया था। हड्डी में मवाद भर जाने से स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी। डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमण इतना बढ़ चुका था कि महिला की जान बचाने के लिए उनका बायां पैर काटना पड़ा। यदि प्रारंभिक उपचार सही ढंग से किया जाता और समय रहते विशेषज्ञ इलाज मिलता, तो शायद यह स्थिति टाली जा सकती थी।
अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप
निर्मला देवी के पति ने जिला अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण उनकी पत्नी को दिव्यांग होना पड़ा। उन्होंने बताया कि घाव से लगातार खून रिसता रहा, लेकिन संबंधित डॉक्टर रक्तस्राव को नियंत्रित नहीं कर सके और न ही संक्रमण की गंभीरता का समय पर पता लगाया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। पहाड़ी जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, संसाधनों का अभाव और रेफरल में देरी जैसी समस्याएं लंबे समय से चर्चा में रही हैं। यदि समय रहते जांच और उचित उपचार किया जाता, तो संभव है कि महिला का पैर बचाया जा सकता था। अब परिजन मामले की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।