गढ़वाल: 12th बोर्ड की छात्रा ने लगाई अलकनंदा में छलांग, घर से आहत होकर निकली थी

देवप्रयाग में 17 वर्षीय छात्रा घर में विवाद के बाद टोडेश्वर पुल से Alaknanda River में डूब गई। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम नदी में लगातार सर्च अभियान चला रही है, लेकिन अभी तक छात्रा का कोई सुराग नहीं मिला है।
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Student drowns in Alaknanda: Student drowns in Alaknanda in Devprayag
Image: Student drowns in Alaknanda in Devprayag

टिहरी गढ़वाल: टिहरी जिले के देवप्रयाग क्षेत्र से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां 17 वर्षीय छात्रा Alaknanda River में डूब गई। घटना के बाद से पुलिस, एसडीआरएफ और जल पुलिस की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है, लेकिन अब तक छात्रा का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

Student drowns in Alaknanda in Devprayag

जानकारी के अनुसार, टिहरी जिले के हिंडोलाखाल पट्टी के एक गांव निवासी छात्रा की बुधवार सुबह परिजनों से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी। विवाद से आहत होकर वह बिना किसी को बताए घर से निकल गई। बताया जा रहा है कि वह करीब 6 किलोमीटर पैदल चलकर देवप्रयाग पहुंची और संगम के पास स्थित टोडेश्वर पुल पर जा खड़ी हुई।

पुल से नदी में डूबते देखा गया

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, छात्रा कुछ देर तक पुल पर खड़ी रही। इसके बाद अचानक उसे अलकनंदा नदी में डूबते हुए देखा गया। नदी की तेज धारा और दूरी अधिक होने के कारण मौके पर मौजूद लोग समय रहते उसे बचा नहीं सके। चश्मदीदों ने बताया कि छात्रा पानी में हाथ-पैर मार रही थी, लेकिन कुछ ही पलों में वह तेज बहाव में ओझल हो गई। इस दृश्य को देख वहां अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।

पुलिस और एसडीआरएफ का रेस्क्यू अभियान जारी

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी Amarjeet Singh Rawat ने बताया कि परिजनों के अनुसार छात्रा 12वीं की छात्रा थी और घर में विवाद के बाद निकल गई थी। फिलहाल, एसडीआरएफ और जल पुलिस की टीम नदी में सघन सर्च अभियान चला रही है। तेज धारा और गहराई के कारण रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। पुलिस परिजनों से पूछताछ कर मामले की विस्तृत जांच भी कर रही है।

प्रशासन की अपील

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि नदी किनारे या पुलों के आसपास सतर्कता बरतें और किसी भी संदिग्ध स्थिति की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
यह घटना एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में बहने वाली तेज धाराओं के खतरे और पारिवारिक संवाद की संवेदनशीलता को उजागर करती है।